मैनपुरी। जनपद में आलू की कीमतों में आई भारी गिरावट से किसान गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। मंडियों में आलू के दाम लगातार कम होने से किसानों को उनकी लागत तक नहीं मिल पा रही है। इससे आलू उत्पादक किसानों में निराशा और चिंता का माहौल बना हुआ है। किसानों का कहना है कि फसल तैयार करने में काफी मेहनत और खर्च लगता है, लेकिन बाजार में मिल रही कीमत बेहद कम होने से उन्हें भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है।
गांव ककवाई निवासी आलू उत्पादक किसान देवेश तिवारी ने बताया कि एक बीघा आलू की फसल तैयार करने में करीब दस हजार रुपये तक की लागत आती है। इसमें बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी का खर्च शामिल होता है। इसके बावजूद मंडी में आलू के दाम इतने कम मिल रहे हैं कि लागत निकालना भी मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय में आलू के 50 किलो के एक पैकेट की कीमत केवल 100 से 150 रुपये तक ही मिल रही है, जो किसानों के लिए बेहद निराशाजनक है।
किसानों का कहना है कि इतनी कम कीमत मिलने से उन्हें खेती में भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। कई किसानों ने आलू की अच्छी पैदावार के लिए कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन अब फसल बिकने के बाद भी कर्ज चुकाना मुश्किल हो रहा है। इससे किसानों की आर्थिक स्थिति पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय किसानों का कहना है कि अगर आलू के दाम इसी तरह कम बने रहे तो आने वाले समय में किसान आलू की खेती से दूरी बनाने को मजबूर हो जाएंगे। उन्होंने सरकार से मांग की है कि आलू के उचित दाम दिलाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसानों को उनकी फसल का सही मूल्य मिल सके और उन्हें नुकसान न उठाना पड़े।
किसानों का यह भी कहना है कि यदि सरकार द्वारा आलू की खरीद या न्यूनतम समर्थन मूल्य जैसी व्यवस्था की जाए तो किसानों को राहत मिल सकती है। फिलहाल मंडियों में आलू की कम कीमतों को लेकर किसान लगातार चिंता और परेशानी का सामना कर रहे हैं।


