डॉ विजय गर्ग
भारत में आईएएस को समाज में सबसे ऊंचा दर्जा प्राप्त है। इसमें कोई शक नहीं कि देश की विविधता को संभालने और कानून व्यवस्था बनाए रखने में नौकरशाही की बड़ी भूमिका रही है। लेकिन, जब बात ‘क्रांतिकारी विचारों’ या वैश्विक स्तर पर गेम-चेंजिंग इनोवेशन की आती है, तो यह सिस्टम अक्सर पीछे रह जाता है।
1. प्रशासन बनाम आविष्कार
एक आईएएस अधिकारी का मुख्य काम मौजूदा सिस्टम को कुशलतापूर्वक चलाना होता है। वे ‘मैनेजर’ हैं, ‘क्रिएटर’ नहीं।
एक वैज्ञानिक शून्य से कुछ नया बनाता है।
एक इनोवेटर पुरानी समस्याओं का बिल्कुल नया समाधान (जैसे युपीआई या स्वदेशी वैक्सीन) ढूंढता है।
प्रशासन केवल इन सुविधाओं को जनता तक पहुँचाने का जरिया बनता है।
2. जोखिम लेने की कमी
वैज्ञानिक और इनोवेटर्स ‘असफलता’ से सीखते हैं। थॉमस एडिसन हजारों बार फेल हुए तब जाकर बल्ब बना। इसके विपरीत, सरकारी तंत्र में ‘फेलियर’ का मतलब होता है सस्पेंशन या जांच। इसलिए, कोई भी अधिकारी लीक से हटकर कुछ ‘क्रांतिकारी’ करने के बजाय सुरक्षित रास्ता चुनना बेहतर समझता है।
3. देश को किसकी सबसे ज्यादा जरूरत है?
आज भारत जिस मोड़ पर खड़ा है, हमें फाइलें साइन करने वालों से ज्यादा समस्या सुलझाने वालों की जरूरत है:
वैज्ञानिक: जो ऊर्जा संकट, क्लाइमेट चेंज और नई बीमारियों का इलाज ढूंढ सकें।
इनोवेटर्स: जो खेती से लेकर कचरा प्रबंधन तक के लिए सस्ते और प्रभावी तकनीक विकसित कर सकें।
एंटरप्रेन्योर्स: जो केवल सरकारी नौकरी न मांगें, बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार पैदा करें।
बदलाव की लहर: ‘जनरल’ से ‘स्पेशलिस्ट’ की ओर
अब समय आ गया है कि हम अपनी शिक्षा प्रणाली और सामाजिक सोच को बदलें।
विशेषज्ञता : हमें जनरल एडमिनिस्ट्रेटर्स की जगह उस क्षेत्र के विशेषज्ञों (जैसे हेल्थ टेक, एआई, और स्पेस साइंस) को निर्णय लेने की शक्ति देनी होगी।
सम्मान का पुनर्वितरण: जब समाज में एक ‘पेटेंट’ कराने वाले वैज्ञानिक को एक ‘कलेक्टर’ के बराबर या उससे अधिक सम्मान मिलेगा, तभी देश का युवा लैब की ओर आकर्षित होगा।
”प्रशासन देश को स्थिरता देता है, लेकिन नवाचार देश को महान बनाता है।”
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश के सामने आज कई बड़ी चुनौतियाँ हैं—जनसंख्या, पर्यावरण संकट, ऊर्जा की बढ़ती मांग, कृषि समस्याएँ और तकनीकी प्रतिस्पर्धा। इन चुनौतियों से निपटने के लिए केवल प्रशासनिक प्रबंधन ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक सोच और नवाचार की भी उतनी ही आवश्यकता है।
अक्सर यह चर्चा होती है कि देश में प्रशासनिक सेवाओं, विशेष रूप से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) को बहुत प्रतिष्ठा और महत्व दिया जाता है। यह सच है कि आईएएस अधिकारी शासन और नीतियों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन देश के दीर्घकालिक विकास के लिए केवल प्रशासनिक ढांचा ही पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और नवाचार करने वाले युवाओं की भी उतनी ही जरूरत होती है।
प्रशासन और नवाचार का संतुलन
आईएएस अधिकारी नीतियों को लागू करते हैं, योजनाओं का संचालन करते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु बनाते हैं। लेकिन नई तकनीकों, वैज्ञानिक खोजों और औद्योगिक नवाचारों के बिना किसी भी देश की प्रगति सीमित रह जाती है।
इतिहास गवाह है कि जिन देशों ने विज्ञान और अनुसंधान को प्राथमिकता दी, वे वैश्विक स्तर पर तेजी से आगे बढ़े। उदाहरण के लिए अंतरिक्ष विज्ञान, सूचना प्रौद्योगिकी और चिकित्सा के क्षेत्र में काम करने वाले वैज्ञानिकों ने मानव जीवन को नई दिशा दी है।
वैज्ञानिकों की भूमिका
भारत में भी कई महान वैज्ञानिक हुए हैं जिन्होंने देश की पहचान विश्व स्तर पर स्थापित की। जैसे ए पी जे. अब्दुल कलाम , जिन्होंने मिसाइल और अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया, और सी वी रमन , जिनकी खोज ने विज्ञान की दुनिया में भारत का नाम रोशन किया।
इन वैज्ञानिकों के योगदान ने यह सिद्ध किया कि ज्ञान और अनुसंधान से देश की दिशा बदली जा सकती है।
नवाचार की आवश्यकता
आज के समय में दुनिया कृत्रिम बुद्धिमत्ता , जैव-प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष अनुसंधान और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रही है। यदि भारत को वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूत बनना है, तो युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार की ओर प्रेरित करना होगा।
स्कूलों और विश्वविद्यालयों में शोध की संस्कृति विकसित करना, प्रयोगशालाओं को मजबूत करना और वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना समय की मांग है।
युवाओं के लिए संदेश
आज कई युवा केवल प्रशासनिक सेवाओं या सरकारी नौकरियों को ही सफलता का एकमात्र रास्ता मान लेते हैं। जबकि देश को ऐसे युवाओं की भी जरूरत है जो नई तकनीक विकसित करें, वैज्ञानिक खोजें करें और समाज की समस्याओं के नए समाधान खोजें।
यदि अधिक से अधिक युवा वैज्ञानिक, इंजीनियर और इनोवेटर बनेंगे, तो देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और तकनीक सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति होगी।
निष्कर्ष
प्रशासनिक सेवाएँ देश की व्यवस्था को मजबूत बनाती हैं, लेकिन वास्तविक परिवर्तन अक्सर विज्ञान और नवाचार के माध्यम से आता है। इसलिए भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो केवल नौकरी पाने के बजाय नई खोज करने और नए विचार देने का साहस रखें।
जब प्रशासनिक दक्षता और वैज्ञानिक नवाचार साथ मिलकर काम करेंगे, तभी भारत एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र के रूप में उभर सकेगा।
डॉ विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रिंसिपल मलोट पंजाब


