यूथ इंडिया
आज के समय में लोगों की जीवनशैली तेजी से बदल रही है। काम का बढ़ता दबाव, तनाव, अनियमित दिनचर्या और भागदौड़ भरी जिंदगी का असर न केवल शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है, बल्कि लोगों की पर्सनल लाइफ भी इससे प्रभावित हो रही है। विशेष रूप से देखा जाए तो इन कारणों से लोगों की सेक्स ड्राइव पर भी असर पड़ने लगा है। जब किसी व्यक्ति की सेक्स ड्राइव कम होने लगती है, तो इसका प्रभाव केवल शारीरिक संबंधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि रिश्तों की गुणवत्ता और मानसिक संतुलन पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जिन कपल्स के बीच संतुलित और स्वस्थ यौन संबंध होते हैं, वे सामान्यतः अधिक खुश रहते हैं। उनके रिश्तों में आपसी समझ और भावनात्मक जुड़ाव बेहतर होता है। इसके साथ ही ऐसे लोगों में तनाव और मानसिक दबाव का स्तर भी अपेक्षाकृत कम पाया जाता है। यही कारण है कि यौन स्वास्थ्य को आज संपूर्ण स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
पुरुषों के संदर्भ में अक्सर यह बात कही जाती है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, वैसे-वैसे उनकी सेक्स ड्राइव भी कम होने लगती है। बहुत से लोग इसे एक सामान्य प्रक्रिया मानते हैं, जबकि कुछ लोगों को इस बारे में सही जानकारी नहीं होती और वे इसे किसी बीमारी या कमजोरी का संकेत समझने लगते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मेडिकल एक्सपर्ट इस बारे में क्या कहते हैं और वास्तव में इसके पीछे क्या कारण होते हैं।
मेडिकवर अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट, एंड्रोलॉजिस्ट और सेक्सोलॉजिस्ट डॉ. विजय दहिफले के अनुसार पुरुषों में बढ़ती उम्र के साथ सेक्स ड्राइव में धीरे-धीरे कमी आना एक सामान्य जैविक प्रक्रिया हो सकती है। पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन नामक हार्मोन होता है, जिसे मुख्य सेक्स हार्मोन माना जाता है। यह हार्मोन यौन इच्छा, ऊर्जा स्तर, मांसपेशियों की ताकत और मानसिक स्थिति को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार उम्र बढ़ने के साथ शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। आमतौर पर 30 से 40 वर्ष की उम्र के बाद पुरुषों में हर साल लगभग एक प्रतिशत तक टेस्टोस्टेरोन का स्तर घट सकता है। इस कारण कई पुरुषों में सेक्स ड्राइव यानी लिबिडो में धीरे-धीरे कमी महसूस हो सकती है। हालांकि यह बदलाव हर व्यक्ति में एक जैसा नहीं होता। कुछ पुरुषों में यह परिवर्तन बहुत धीरे-धीरे होता है, जबकि कुछ लोगों में यह ज्यादा स्पष्ट रूप से महसूस हो सकता है।
यह भी समझना जरूरी है कि केवल उम्र ही सेक्स ड्राइव में कमी का कारण नहीं होती। कई अन्य कारक भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। व्यक्ति की जीवनशैली, शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति, खान-पान की आदतें और सामाजिक परिस्थितियां भी यौन इच्छा को प्रभावित कर सकती हैं।
उदाहरण के लिए अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से किसी बीमारी से पीड़ित है, तो इसका असर उसके हार्मोनल संतुलन पर पड़ सकता है। हृदय रोग, डायबिटीज, मोटापा और ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां भी टेस्टोस्टेरोन के स्तर को प्रभावित कर सकती हैं। इसके अलावा इन बीमारियों के इलाज में दी जाने वाली कुछ दवाइयों का भी असर यौन इच्छा पर पड़ सकता है।
शारीरिक थकान और कमजोरी भी सेक्स ड्राइव को कम कर सकती है। जब शरीर में ऊर्जा की कमी होती है, तो व्यक्ति का मन यौन गतिविधियों की ओर कम जाता है। यही कारण है कि जो लोग अत्यधिक काम के दबाव में रहते हैं या पर्याप्त आराम नहीं कर पाते, उनमें भी यह समस्या देखने को मिल सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य भी यौन इच्छा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। अगर कोई व्यक्ति तनाव, अवसाद, चिंता या मानसिक दबाव से गुजर रहा है, तो उसकी सेक्स ड्राइव पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। कई बार रिलेशनशिप से जुड़े तनाव या भावनात्मक दूरी भी इस समस्या को बढ़ा सकते हैं।
आधुनिक जीवनशैली की कुछ आदतें भी इस समस्या के लिए जिम्मेदार मानी जाती हैं। जैसे देर रात तक जागना, पर्याप्त नींद न लेना, जंक फूड का अधिक सेवन करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और लगातार स्क्रीन के सामने समय बिताना शरीर के हार्मोनल संतुलन को प्रभावित कर सकता है। इन कारणों से धीरे-धीरे शरीर की ऊर्जा कम होने लगती है और सेक्स ड्राइव पर भी असर पड़ सकता है।
हालांकि अच्छी बात यह है कि पुरुष अपनी जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव करके इस समस्या को काफी हद तक नियंत्रित कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित व्यायाम करना यौन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। व्यायाम से शरीर में रक्त संचार बेहतर होता है और हार्मोन संतुलित रहते हैं। इससे शरीर की ऊर्जा बढ़ती है और आत्मविश्वास भी बेहतर होता है।
संतुलित आहार भी इस विषय में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पोषक तत्वों से भरपूर भोजन शरीर के हार्मोनल संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। फल, सब्जियां, प्रोटीन और स्वस्थ वसा से भरपूर आहार शरीर को आवश्यक ऊर्जा प्रदान करता है और समग्र स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
पर्याप्त नींद लेना भी बहुत जरूरी है। जब शरीर को पर्याप्त आराम मिलता है, तो हार्मोनल सिस्टम बेहतर तरीके से काम करता है। वहीं लगातार नींद की कमी शरीर के टेस्टोस्टेरोन स्तर को प्रभावित कर सकती है। इसलिए रोजाना सात से आठ घंटे की अच्छी नींद लेना स्वास्थ्य के लिए जरूरी माना जाता है।
इसके अलावा मानसिक तनाव को कम करना भी बहुत महत्वपूर्ण है। योग, ध्यान और अन्य रिलैक्सेशन तकनीकें तनाव को कम करने में मदद कर सकती हैं। मानसिक शांति और भावनात्मक संतुलन बनाए रखने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है और इससे यौन जीवन भी बेहतर हो सकता है।
डॉ. विजय दहिफले के अनुसार अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक सेक्स ड्राइव में कमी महसूस हो रही है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कई बार इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन या कोई अन्य मेडिकल समस्या भी हो सकती है। ऐसे मामलों में डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है। जरूरत पड़ने पर हार्मोन जांच, मेडिकल ट्रीटमेंट या सेक्स थेरेपी भी मददगार साबित हो सकती है।
विशेषज्ञ यह भी बताते हैं कि पुरुषों को इस विषय पर खुलकर बात करनी चाहिए। कई लोग झिझक या शर्म की वजह से अपनी समस्या किसी से साझा नहीं करते, जिससे समस्या और बढ़ सकती है। सही समय पर सलाह लेने से इस तरह की समस्याओं का समाधान आसानी से किया जा सकता है।
कुल मिलाकर यह कहा जा सकता है कि बढ़ती उम्र के साथ पुरुषों में सेक्स ड्राइव में कुछ बदलाव आना सामान्य है, लेकिन यह हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर, मानसिक तनाव को नियंत्रित रखकर और अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखकर लंबे समय तक बेहतर यौन स्वास्थ्य बनाए रखा जा सकता है। अगर किसी को इस विषय से जुड़ी कोई परेशानी महसूस हो, तो विशेषज्ञ से सलाह लेना सबसे सुरक्षित और प्रभावी तरीका माना जाता है।


