औरैया
जनपद में कर चोरी के एक बड़े संगठित नेटवर्क का पुलिस ने खुलासा करते हुए 8.62 करोड़ रुपये के फर्जी जीएसटी बिल घोटाले का पर्दाफाश किया है। इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो फर्जी फर्मों के माध्यम से कागजों पर लेनदेन दिखाकर सरकार को भारी राजस्व का नुकसान पहुंचा रहे थे। कार्रवाई के बाद विभाग और प्रशासन में हड़कंप मच गया है।
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से कई फर्जी जीएसटी फर्मों का निर्माण किया और उनके जरिए करोड़ों रुपये के नकली बिल तैयार किए। ‘मून इंटरप्राइजेज’ के नाम से करीब 2.87 करोड़ रुपये और ‘चमन ट्रेडर्स’ के जरिए लगभग 5.75 करोड़ रुपये के फर्जी बिल बनाए गए। इन फर्मों के माध्यम से केवल दस्तावेजों में व्यापार दर्शाया गया, जबकि वास्तविक रूप से किसी प्रकार का माल का लेनदेन नहीं हुआ।
आरोपी इस फर्जीवाड़े के जरिए इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) पास-ऑन कर रहे थे, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंच रहा था। पुलिस और संबंधित विभागों की संयुक्त जांच में यह भी सामने आया कि यह पूरा गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और सुनियोजित तरीके से टैक्स चोरी को अंजाम दे रहा था।
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और 60,330 रुपये नकद भी बरामद किए हैं, जो इस फर्जी नेटवर्क के संचालन में इस्तेमाल किए जा रहे थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा रही है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के आर्थिक अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी कीमत पर राजस्व चोरी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के फर्जी बिलिंग रैकेट से न केवल सरकारी आय को नुकसान होता है, बल्कि व्यापारिक व्यवस्था की पारदर्शिता भी प्रभावित होती है।


