इटावा। डॉ. भीमराव आंबेडकर संयुक्त जिला अस्पताल की इमरजेंसी में रविवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब बंदर के काटने पर एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने आए एक युवक ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर से बहस करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। युवक ने डॉक्टर के ड्यूटी के दौरान मसाला खाने का आरोप लगाते हुए विवाद खड़ा कर दिया और डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को मौके पर बुला लिया। करीब आधे घंटे तक चले इस हाईवोल्टेज ड्रामे से अस्पताल की इमरजेंसी में मौजूद मरीजों और तीमारदारों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
जानकारी के अनुसार राजस्थान के सीकर जिले के खाटूश्याम निवासी अशोक मीणा किसी काम से लखनऊ गए थे। रविवार को वह ट्रेन से इटावा पहुंचे थे और उन्हें शाम करीब सवा चार बजे दूसरी ट्रेन से वापस राजस्थान जाना था। इसी दौरान रेलवे स्टेशन के बाहर सामान खरीदने के लिए जाते समय एक बंदर ने उनके बाएं हाथ पर काट लिया। इसके बाद वह करीब तीन बजे एंटी-रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचे।
आरोप है कि इमरजेंसी ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर राहुल बाबू उस समय मसाला खा रहे थे। इसी बात को लेकर युवक और डॉक्टर के बीच कहासुनी हो गई। युवक ने डॉक्टर को ड्यूटी के दौरान मसाला खाने पर टोका, जिस पर दोनों के बीच विवाद बढ़ गया। युवक का आरोप था कि डॉक्टर ने इंजेक्शन लगाने से मना कर दिया और कहा कि जो करना है कर लो। इसके बाद युवक ने डायल-112 पर कॉल कर पुलिस को बुला लिया।
सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों पक्षों को समझाने का प्रयास किया। पुलिस ने युवक से इंजेक्शन लगवाकर जाने को कहा, लेकिन युवक ने यह कहते हुए इंजेक्शन लगवाने से इंकार कर दिया कि डॉक्टर उसे जहर का इंजेक्शन लगा सकते हैं। इसके बाद वह पुलिसकर्मियों से भी उलझ गया और दोबारा डायल-112 पर कॉल कर मौके पर आए पुलिसकर्मियों पर भी डॉक्टर से मिलीभगत का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करा दी।
मामले की जानकारी मिलने पर सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की मोतीझील चौकी के प्रभारी सुरेश कुमार भी जिला अस्पताल पहुंचे और युवक को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह शांत नहीं हुआ। बताया गया कि युवक शराब के नशे में था। स्थिति को देखते हुए पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर थाने भेज दिया। करीब आधे घंटे तक इमरजेंसी में हंगामा चलता रहा, जिससे वहां इलाज कराने आए अन्य मरीजों को भी परेशानी हुई।
गौरतलब है कि जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तीन दिनों के भीतर हंगामे की यह दूसरी घटना है। इससे पहले एक घायल व्यक्ति की इलाज के दौरान मौत के बाद परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए इमरजेंसी में तोड़फोड़ और मारपीट की थी, जिसके बाद स्थिति संभालने के लिए पुलिस बल बुलाना पड़ा था।


