मैनपुरी: जिला संगठन की नई कार्यकारिणी के गठन को लेकर आयोजित कोर कमेटी की बैठक मंगलवार को हंगामेदार माहौल में समाप्त हो गई। विभिन्न पदों पर नियुक्ति को लेकर सदस्यों के बीच आम सहमति नहीं बन सकी, जिससे बैठक में तीखी बहस और तनातनी की स्थिति पैदा हो गई। अंततः जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षक बैठक के बीच से ही उठकर चले गए, जिससे संगठन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आ गए।
बैठक में पर्यवेक्षक सत्यपाल सैनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि उन्हें संगठन की मजबूती के उद्देश्य से पर्यवेक्षक बनाकर भेजा गया है और वह अपनी रिपोर्ट में उन्हीं कार्यकर्ताओं के नाम शामिल करेंगे जो सक्रिय रूप से पार्टी के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संगठन में पद उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए जिन्होंने जमीनी स्तर पर मेहनत की है और जनता के बीच पार्टी की पकड़ मजबूत की है।
सूत्रों के अनुसार, नई जिला कार्यकारिणी में शामिल किए जाने वाले विभिन्न पदाधिकारियों के नामों को लेकर कई सदस्यों ने आपत्ति जताई। कुछ कार्यकर्ताओं ने वरिष्ठता और अनुभव को प्राथमिकता देने की मांग की, जबकि अन्य ने सक्रियता और हालिया योगदान को आधार बनाने की बात कही। इसी मुद्दे पर बैठक में लंबे समय तक बहस होती रही और माहौल गरमा गया।
तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए जिलाध्यक्ष और पर्यवेक्षक सत्यपाल सैनी बैठक के बीच से ही उठ गए। उनके जाने के बाद बैठक बिना किसी ठोस निर्णय के समाप्त हो गई। संगठन के भीतर चल रही इस खींचतान को लेकर कार्यकर्ताओं में चर्चा का माहौल बना हुआ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक एकजुटता बेहद जरूरी है। ऐसे में जिला कार्यकारिणी गठन को लेकर मतभेद पार्टी के लिए चुनौती बन सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि पर्यवेक्षक अपनी रिपोर्ट में किन नामों की सिफारिश करते हैं और संगठन स्तर पर सहमति बनाने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।


