ईरान पर अमेरिकी-इस्राइली हमले तेज, दूतावास बंद, तेल बाजार में उथल-पुथल

ट्रैफिक कैमरे बने खामेनेई और टॉप अधिकारियों की मौत की वजह

नई दिल्ली| पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब व्यापक क्षेत्रीय संकट का रूप लेता जा रहा है। ईरान और इस्राइल के बीच छिड़ा संघर्ष चौथे दिन और अधिक उग्र हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका की खुली सैन्य भागीदारी के बाद हमलों की तीव्रता बढ़ी है और दोनों पक्षों की ओर से लगातार मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले किए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया है कि यह अभियान कई सप्ताह तक चल सकता है, जिससे पूरे मध्य-पूर्व में अस्थिरता और भय का माहौल है।
पश्चिमी ईरान के हमादान शहर में रिहायशी इलाकों पर हुए अमेरिकी-इस्राइली हमलों में कम से कम पांच नागरिकों की मौत और 25 से अधिक लोगों के घायल होने की पुष्टि ईरानी मीडिया ने की है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कई मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं और राहत-बचाव दल मलबे में दबे लोगों को निकालने में जुटे हैं। दक्षिणी ईरान के केरमान प्रांत में स्थित एक सैन्य अड्डे पर हुए हमले में 13 ईरानी सैनिकों के मारे जाने की जानकारी ईरानी सेना ने दी है। इसके अलावा बुशहर क्षेत्र में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के पांच जवानों की मौत की भी खबर है। इन हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इस्राइली ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है।
संघर्ष का असर खाड़ी देशों तक पहुंच गया है। रियाद स्थित अमेरिकी दूतावास पर ड्रोन हमले के बाद उसे अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। सऊदी अरब के रक्षा मंत्रालय ने दो ड्रोन हमलों की पुष्टि की है। वहीं कुवैत में अमेरिकी दूतावास को ‘अगले आदेश तक’ बंद रखने का निर्णय लिया गया है। अमेरिका ने बहरीन और जॉर्डन में तैनात अपने गैर-आपातकालीन कर्मचारियों और उनके परिवारों को तत्काल वापस बुलाने का आदेश जारी किया है। अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य-पूर्व में रह रहे अपने नागरिकों को क्षेत्र छोड़ने की सलाह भी दी है।
तनाव का सीधा असर आम नागरिकों और शिक्षा व्यवस्था पर भी पड़ा है। कुवैत में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं 5 और 6 मार्च को स्थगित कर दी गई हैं। नई तिथियों की घोषणा बाद में की जाएगी। कतर ने सुरक्षा कारणों से अपना एयरस्पेस अस्थायी रूप से बंद कर दिया है, जिसके चलते कतर एयरवेज की कई उड़ानें निलंबित हैं। कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस ने भी अपने रूट बदल दिए हैं।
युद्ध का आर्थिक प्रभाव भी सामने आने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास बढ़ते खतरे के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 2 से 3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो वैश्विक आपूर्ति शृंखला और ईंधन कीमतों पर व्यापक असर पड़ सकता है।
इस बीच फ्रांस ने साइप्रस में एक ब्रिटिश एयरबेस को ड्रोन से निशाना बनाए जाने के बाद वहां एंटी-ड्रोन और एंटी-मिसाइल सिस्टम भेजने की योजना बनाई है। लेबनान की राजधानी बेरूत में भी इस्राइली जवाबी कार्रवाई के तहत नए धमाकों की खबरें आई हैं। क्षेत्रीय विश्लेषकों का मानना है कि यदि हिज्बुल्ला और अन्य गुट सक्रिय रूप से शामिल होते हैं तो यह संघर्ष और व्यापक हो सकता है।
युद्ध जैसे हालात के बीच ईरान के गेराश इलाके में 4.3 तीव्रता का भूकंप भी दर्ज किया गया, जिससे लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि भूकंप से बड़े नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन पहले से ही तनावग्रस्त माहौल में इससे भय और बढ़ गया है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में साइबर और खुफिया तंत्र की भूमिका भी निर्णायक साबित हो रही है। हालिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि वर्षों की डिजिटल निगरानी और सिग्नल इंटेलिजेंस के जरिए महत्वपूर्ण ठिकानों की सटीक जानकारी जुटाई गई। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल पूरा पश्चिम एशिया अस्थिरता के दौर से गुजर रहा है। कूटनीतिक प्रयासों की चर्चा जरूर हो रही है, लेकिन जमीनी हालात लगातार बिगड़ते नजर आ रहे हैं। यदि जल्द कोई मध्यस्थता नहीं हुई तो यह संघर्ष लंबे और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध में बदल सकता है।

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