लंदन: यूनाइटेड किंगडम के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को कहा कि वह ईरान के खिलाफ अमेरिका-इज़राइल के शुरुआती साझा हमले का समर्थन न करने के अपने फैसले पर कायम हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने से पहले ब्रिटेन के राष्ट्रीय हितों का आकलन करना उनकी जिम्मेदारी है, और उन्होंने वही किया है।
अमेरिका ने ईरान पर हवाई हमले के लिए ब्रिटेन से हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया एयरबेस के इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। ब्रिटेन ने इस पर तुरंत मंजूरी नहीं दी, जिससे दोनों देशों के बीच असहजता की स्थिति पैदा हुई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर स्टार्मर की आलोचना भी की थी।
स्टार्मर ने कहा कि ब्रिटेन किसी भी संघर्ष में जल्दबाजी में कदम नहीं उठाएगा और हर निर्णय अंतरराष्ट्रीय कानून तथा राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनजर लिया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
पश्चिम एशिया में ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक राजनीति को प्रभावित किया है। ब्रिटेन ने अब तक प्रत्यक्ष सैन्य भूमिका से दूरी बनाए रखी है, हालांकि वह क्षेत्रीय सुरक्षा हालात पर नजर रखे हुए है।
इस बीच ब्रिटेन की गृह सचिव शबाना महमूद ने देश की शरण प्रणाली में बड़े सुधारों की घोषणा की है। नए नियमों के तहत अब रिफ्यूजी स्टेटस स्थायी नहीं रहेगा। सोमवार से लागू व्यवस्था में शरण मांगने वाले सभी वयस्कों की स्थिति की हर 30 महीने में समीक्षा की जाएगी। महमूद ने इसे “सख्त लेकिन निष्पक्ष” कदम बताया है।
सरकार का कहना है कि यह बदलाव डेनमार्क मॉडल से प्रेरित है, जहां सख्त समीक्षा प्रणाली लागू होने के बाद शरण दावों में उल्लेखनीय कमी आई है। नए प्रावधानों के अनुसार, यदि समीक्षा के समय किसी शरणार्थी का गृह देश सुरक्षित पाया जाता है तो उसे वापस लौटना होगा।
पहले की व्यवस्था में पांच वर्ष की सुरक्षा अवधि के बाद लगभग स्वतः स्थायी निवास का मार्ग खुल जाता था। अब सुरक्षा की निरंतर आवश्यकता का मूल्यांकन किया जाएगा। फिलहाल शरणार्थियों के लिए परिवार स्पॉन्सर करने के विकल्प पर भी रोक लगा दी गई है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि जिन शरणार्थियों के पास विशेष कौशल हैं, वे वर्क या स्टडी वीजा के लिए आवेदन कर सकेंगे। उम्र संबंधी गलत दावों को पकड़ने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तकनीक के परीक्षण की भी योजना है।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष ब्रिटेन में शरण मांगने वालों में भारतीय नागरिक सातवें स्थान पर रहे। नए नियमों से आव्रजन नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जिसका असर आने वाले वर्षों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकता है।


