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Sunday, March 1, 2026

पिता को मुखाग्नि देकर टीम से जुड़े रिंकू सिंह, बोले—‘पापा के लिए रन बनाऊंगा’

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अलीगढ| भारतीय क्रिकेटर रिंकू सिंह ने पिता के निधन के गहरे दुख के बीच भी कर्तव्य और पेशेवर जिम्मेदारी का उदाहरण पेश किया है। शुक्रवार को नोएडा के एक अस्पताल में उनके पिता खानचंद का निधन हो गया। अंतिम संस्कार की सभी रस्में निभाने और परिवार को संभालने के बाद रिंकू शनिवार को कोलकाता पहुंचकर टीम से दोबारा जुड़ गए। रवाना होने से पहले उन्होंने भावुक होकर कहा कि वह अपने पिता की याद में बेहतर प्रदर्शन करेंगे और “पापा के लिए रन बनाऊंगा।”
रिंकू सिंह के पिता खानचंद लीवर कैंसर के स्टेज-4 से पीड़ित थे। उन्हें मंगलवार को नोएडा स्थित यथार्थ अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां वेंटिलेटर पर रखकर रिप्लेसमेंट थेरेपी दी जा रही थी। हालत गंभीर होने की सूचना पर रिंकू भी अस्पताल पहुंचे थे। इलाज के दौरान उनके बड़े भाई सोनू सिंह लगातार अस्पताल में मौजूद रहे और पिता की देखरेख करते रहे, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
अंतिम संस्कार के दौरान रिंकू ने मां बीना देवी और छोटी बहन नेहा सिंह को ढांढस बंधाया और हिम्मत बनाए रखने को कहा। बड़े भाई सोनू सिंह को घर की जिम्मेदारी सौंपते हुए उन्होंने कहा कि अब परिवार की बागडोर संभालनी होगी और मां का विशेष ध्यान रखना होगा। पारिवारिक दायित्व निभाने के बाद वह शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे अलीगढ़ के ओजोन सिटी स्थित आवास से रवाना हुए और कोलकाता पहुंचकर टीम के साथ अभ्यास में शामिल हो गए। विपरीत परिस्थितियों में भी राष्ट्रीय दायित्व को प्राथमिकता देने की उनकी भावना की क्रिकेट जगत में सराहना हो रही है।
इधर, अलीगढ़ के ओजोन सिटी स्थित उनके घर पर दूसरे दिन भी शोक संवेदना व्यक्त करने वालों का तांता लगा रहा। विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग परिवार को सांत्वना देने पहुंचे। सभी ने रिंकू और उनके परिजनों को इस कठिन समय में हिम्मत बनाए रखने की सलाह दी।
परिवार के करीबी लोगों के अनुसार, शुरुआत में खानचंद बेटे के क्रिकेट खेलने के पक्ष में नहीं थे और चाहते थे कि वह स्थिर नौकरी करे। हालांकि एक स्थानीय टूर्नामेंट में रिंकू को इनाम के रूप में मोटरसाइकिल मिलने के बाद उनका नजरिया बदला। आर्थिक तंगी के बावजूद उन्होंने बेटे के क्रिकेट करियर में हर संभव सहयोग दिया। पिछले वर्ष रिंकू ने भी अपने पिता को 3.19 लाख रुपये की कावासाकी निंजा बाइक उपहार में देकर उनका सम्मान किया था।
पिता के सपनों को साकार करने का संकल्प लेकर मैदान में उतरे रिंकू सिंह के लिए यह समय निजी शोक और पेशेवर जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। क्रिकेट प्रेमियों को अब उनके बल्ले से निकली हर पारी में उस बेटे की संवेदना और संकल्प की झलक देखने की उम्मीद है, जो अपने पिता की स्मृति को अपनी ताकत बना चुका है।

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