लखनऊ/उन्नाव। यूजीसी से जुड़े प्रकरण के बीच “90 बनाम 10” वाले बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। बयान सामने आते ही खासकर ब्राह्मण समाज के एक वर्ग ने सोशल मीडिया पर नाराज़गी जताई, वहीं समर्थकों ने इसे संदर्भ से काटकर पेश करने का आरोप लगाया।
ट्विटर, फेसबुक और अन्य प्लेटफॉर्म पर बयान के पक्ष–विपक्ष में बहस छिड़ी हुई है। एक ओर कुछ यूज़र्स ने इसे जातीय असंतुलन से जोड़कर सवाल उठाए, तो दूसरी ओर समर्थकों का कहना है कि बयान का आशय गलत तरीके से पेश किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, विवादित बयान अक्सर तेज़ी से वायरल होते हैं और वही इस बार भी हुआ—कुछ ही घंटों में क्लिप देशभर में फैल गई।
समर्थक नेताओं का कहना है कि साक्षी महाराज ऐसे जनप्रतिनिधि हैं जिन्हें विभिन्न जातियों के साथ-साथ मुस्लिम समुदाय के मतदाता भी समर्थन देते रहे हैं। उनका तर्क है कि एक बयान को आधार बनाकर व्यापक सामाजिक समर्थन को नज़रअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए।
राजनीतिक संचार के विशेषज्ञ मानते हैं कि आज के दौर में एक लाइन का बयान भी राष्ट्रीय बहस का मुद्दा बन सकता है। “90 बनाम 10” टिप्पणी ने यही किया—समर्थन और विरोध, दोनों को एक साथ सक्रिय कर दिया।
फिलहाल, बयान को लेकर स्पष्टीकरण और आगे की राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का इंतज़ार है। लेकिन इतना तय है कि एक बयान ने नेता को देशव्यापी चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





