पाकिस्तान प्रशासन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के गिलगित-बाल्टिस्तान क्षेत्र में ड्रोन उड़ानों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय गृह मंत्रालय के निर्देश पर लिया गया है। गिलगित-बाल्टिस्तान पुलिस के प्रवक्ता के अनुसार, आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि कानून प्रवर्तन और खुफिया एजेंसियों को अपने आधिकारिक दायित्वों के तहत ड्रोन उपयोग की छूट रहेगी।
यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर है। सुरक्षा एजेंसियों को आशंका है कि ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी, हथियार आपूर्ति या हमलों के लिए किया जा सकता है। हालिया घटनाक्रम को देखते हुए प्रशासन ने एहतियाती तौर पर यह प्रतिबंध लागू किया है ताकि संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संभावित खतरे को रोका जा सके।
दूसरी ओर, अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने दावा किया है कि उसने रातभर चले सैन्य अभियानों में 55 पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। तालिबान की प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कार्रवाई डूरंड लाइन के आसपास पक्तिका, पक्तिया, खोस्त, नंगरहार, कुनार और नूरिस्तान प्रांतों के निकट की गई। दावा किया गया कि दो पाकिस्तानी सैन्य अड्डों और 19 चौकियों पर कब्जा भी किया गया।
तालिबान प्रशासन ने कहा कि यह कार्रवाई पाकिस्तानी सेना की “उकसावे वाली गतिविधियों” के जवाब में की गई। बयान में यह भी उल्लेख किया गया कि अभियान पूर्व निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के बाद इस्लामिक अमीरात के चीफ ऑफ जनरल स्टाफ के आदेश पर मध्यरात्रि में समाप्त कर दिया गया। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
पाकिस्तान ने तालिबान के दावों को खारिज करते हुए जवाबी कार्रवाई का दावा किया है। पाकिस्तानी सेना का कहना है कि उसने अफगानिस्तान में कई ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिनमें बड़ी संख्या में तालिबानी लड़ाके मारे गए। दोनों पक्षों के दावों में भारी अंतर है, जिससे वास्तविक स्थिति का आकलन करना कठिन हो गया है।
दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ डूरंड लाइन को लेकर लंबे समय से चला आ रहा विवाद है। इसके अलावा पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि अफगान तालिबान, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) के लड़ाकों को शरण दे रहा है। तालिबान इन आरोपों को सिरे से खारिज करता आया है। यही मुद्दा हालिया सैन्य कार्रवाइयों की प्रमुख वजह बताया जा रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि गिलगित-बाल्टिस्तान में ड्रोन प्रतिबंध सुरक्षा रणनीति का हिस्सा है, ताकि किसी भी संभावित निगरानी या हमले को रोका जा सके। यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है, जहां पहले भी सुरक्षा अलर्ट जारी किए जाते रहे हैं।
क्षेत्रीय स्थिरता के लिए यह बढ़ता टकराव गंभीर चुनौती बनता जा रहा है। यदि दोनों पक्ष सैन्य कार्रवाई जारी रखते हैं तो इसका असर न केवल सीमा क्षेत्रों बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की सुरक्षा पर पड़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने के प्रयासों की आवश्यकता महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि संवाद और भरोसे की बहाली के बिना हालात सामान्य होना कठिन है। ड्रोन प्रतिबंध जैसे कदम तत्काल सुरक्षा तो बढ़ा सकते हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान केवल बातचीत से ही संभव होगा।
फिलहाल सीमा पर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। दोनों देशों की सेनाएं हाई अलर्ट पर हैं और नागरिकों में भी चिंता का माहौल है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या सैन्य टकराव कम होता है या संघर्ष और व्यापक रूप लेता है।


