एटा
जिले स्थित जवाहर तापीय परियोजना में वेतन भुगतान न होने से आक्रोशित श्रमिकों की हड़ताल दूसरे दिन भी जारी रही। सात माह से वेतन न मिलने के कारण मजदूरों ने काम बंद कर प्रदर्शन तेज कर दिया है, जिससे प्लांट का कार्य प्रभावित होने लगा है। श्रमिकों का कहना है कि लंबे समय से आश्वासन मिल रहा था, लेकिन भुगतान नहीं किया गया, जिसके चलते उन्हें यह कदम उठाना पड़ा।
पॉवर प्लांट परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारियों और श्रमिकों ने एकत्र होकर नारेबाजी की और बकाया वेतन जल्द दिलाने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं। कई मजदूरों ने बताया कि परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों का खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। सात महीने से वेतन न मिलने के कारण उनके सामने रोजमर्रा की समस्याएं खड़ी हो गई हैं।
उधर मैन पावर कंपनियों ने भी मुख्य निर्माण कंपनी दुसान के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कंपनियों का आरोप है कि मुख्य कंपनी ने पिछले दो वर्षों से करोड़ों रुपये का भुगतान रोक रखा है। उनका कहना है कि जब तक उन्हें बकाया धनराशि नहीं मिलेगी, तब तक वे श्रमिकों को वेतन देने की स्थिति में नहीं हैं। मैन पावर कंपनियों ने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है और मामले की जांच कराते हुए भुगतान सुनिश्चित कराने की अपील की है।
हड़ताल के चलते परियोजना में चल रहे निर्माण और रखरखाव कार्यों पर असर पड़ने लगा है। सूत्रों के अनुसार यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो प्लांट के संचालन पर भी प्रभाव पड़ सकता है। प्रशासनिक अधिकारियों ने स्थिति पर नजर बनाए रखने की बात कही है, जबकि श्रमिकों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक बकाया वेतन का भुगतान नहीं होता, उनका आंदोलन जारी रहेगा।
जवाहर तापीय परियोजना प्रदेश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परियोजनाओं में गिनी जाती है। ऐसे में वेतन विवाद के चलते काम प्रभावित होना न केवल श्रमिकों बल्कि ऊर्जा उत्पादन व्यवस्था के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। अब देखना होगा कि शासन और संबंधित कंपनियां इस विवाद का समाधान कब तक निकाल पाती हैं।


