वाराणसी: ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती (Avimukteshwaranand Saraswati) ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) द्वारा फैसला सुरक्षित रखने और उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके खिलाफ मीडिया ट्रायल चलाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फैसला अदालत के बाहर सुनाया जा रहा था, लेकिन आज सच्चाई की जीत हुई है।
शंकराचार्य ने कहा, “अदालत ने गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। न्यायाधीश ने हमारे इस तर्क को सही पाया कि मामला मनगढ़ंत था, और इसलिए यह आदेश पारित किया गया। न्यायाधीश ने हमारी बात समझी। बटुक के आश्रम में रहने की जो व्यापक रूप से प्रचारित खबरें अब तक फैलाई जा रही थीं, वे साबित नहीं हो सकीं। एक झूठी कहानी गढ़कर पूरे देश को गुमराह किया गया।”
उन्होंने आगे कहा कि विपक्ष ने “अदालत में सीडी का जिक्र तक नहीं किया। सबूत पेश किए जा सकते थे। इसका मतलब है कि मीडिया में सीडी का इस्तेमाल करके ट्रायल चलाया जा रहा था, और फैसला अदालत के बाहर सुनाया जा रहा था। मानहानि की कार्यवाही पर आगे विचार किया जाएगा।” शंकराचार्य ने कहा कि वे शुरू से ही जांच में पुलिस के साथ सहयोग करने के इच्छुक रहे हैं और आगे भी ऐसा करते रहेंगे।
उन्होंने पूछा, “हाई कोर्ट के आज के फैसले के अनुसार पुलिस स्तर पर पहले कार्रवाई क्यों नहीं की गई? बच्चों को किशोर सुधारगृह क्यों नहीं भेजा गया? बच्चों की उचित हिरासत की मांग की गई थी, और आज अदालत में उचित प्रक्रिया का पालन किया गया।” उन्होंने आगे कहा, “हर कोई किसी के वश में नहीं रह सकता। कहीं न कहीं कोई न कोई ऐसा होता है जो सही और गलत को समझता है।
आज देश की जनता को सच्चाई पता चल गई है। मैंने शुरू से ही दो बातें कही थीं: मेरा बच्चों से कोई संबंध नहीं है। पीओसीएसओ अधिनियम के तहत एक आपराधिक रिकॉर्ड वाले अपराधी की हिरासत में बच्चे कैसे हो सकते हैं? बच्चे परीक्षा दे रहे हैं, और मुझ पर आरोप लगाया गया है।” देश भर के लोग अदालत की कार्यवाही ऑनलाइन देख रहे थे।


