डॉ. विजय गर्ग
आज का युग डिजिटल युग है। मोबाइल फोन मानव जीवन का अभिन्न अंग बन गए हैं। जहां ये सुविधाएं और सूचनाओं का खजाना हैं, वहीं इनका पारिवारिक संबंधों और बच्चों के भविष्य पर भी गहरा प्रभाव पड़ रहा है। सबसे बड़ा प्रभाव माता-पिता और बच्चों के रिश्तों पर देखने को मिलता है।
मोबाइल: सुविधा या दूरी का कारण?
आज माता-पिता अपने व्यस्त और व्यस्त जीवन के कारण बच्चों से बातचीत करने के लिए कम समय निकालते हैं। अक्सर बच्चों को चुप रहने के लिए उनके हाथ में मोबाइल दिया जाता है। शुरुआत में यह एक आसान समाधान लगता है, लेकिन धीरे-धीरे यह आदत बन जाती है।
बच्चा माता-पिता की गोद के स्थान पर स्क्रीन से जुड़ जाता है। परिणामस्वरूप भावनात्मक जुड़ाव कम हो जाता है।
बच्चों के विकास पर प्रभाव
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित करता है:
भाषा विकास में देरी
ध्यान केंद्रित करने की क्षमता में कमी
नींद की समस्या
आंखों और शारीरिक स्वास्थ्य पर प्रभाव
क्रोध और चिड़चिड़ापन बढ़ना
यदि बच्चे बाहर खेलने के बजाय स्क्रीन के सामने बैठते हैं, तो उनकी सामाजिक क्षमताएं भी कम हो जाती हैं।
माता-पिता की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है
बच्चे वही सीखते हैं जो वे देखते हैं। यदि माता-पिता स्वयं हर समय मोबाइल में व्यस्त रहते हैं, तो बच्चों को मोबाइल से दूर रखना कठिन हो जाता है।
माता-पिता के लिए कुछ आवश्यक कदम:
घर पर समय निर्धारित करें
भोजन करते समय स्क्रीन से दूर रहें
बच्चों के साथ दैनिक बातचीत करें
कहानियां सुनाएं और किताबें पढ़ने के लिए प्रेरित करें
बाहर खेलने और रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान दें
प्रौद्योगिकी का संतुलित उपयोग
मोबाइल पूरी तरह से गलत नहीं हैं। वे शिक्षा, सूचना और रचनात्मकता के लिए उपयोगी उपकरण हैं। लेकिन उपयोग की अवधि और सामग्री पर नियंत्रण अनिवार्य है।
परिणाम
बच्चों को प्यार, समय और मार्गदर्शन की जरूरत होती है, मोबाइल की नहीं। यदि माता-पिता अपने बच्चों के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताते हैं, तो वे न केवल प्रौद्योगिकी का सही उपयोग करना सीखेंगे, बल्कि जीवन के वास्तविक मूल्यों को भी समझ पाएंगे।
मोबाइल एक साधन है — लेकिन पारिवारिक संबंध जीवन की असली ताकत हैं।
डॉ. विजय गर्ग सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य शैक्षिक स्तंभकार मलोट पंजाब


