नगला भोजराज में एक साथ पांच शवों का अंतिम संस्कार
कासगंज: अमांपुर क्षेत्र में आर्थिक तंगी और पारिवारिक विषम परिस्थितियों के बीच एक ही परिवार के पांच सदस्यों की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। नगला भोजराज निवासी सत्यवीर, उनकी पत्नी रामश्री और तीन मासूम बच्चों के शव शनिवार शाम अमांपुर के एटा रोड स्थित एक बंद मकान से बरामद हुए। इस हृदयविदारक घटना के बाद पुलिस ने सभी शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया। रविवार सुबह जब पांचों शव एक साथ ट्रैक्टर-ट्रॉली से गांव पहुंचे तो वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं और परिजनों की चीत्कार से माहौल गूंज उठा।
रविवार सुबह करीब साढ़े सात बजे शव नगला भोजराज पहुंचे। ट्रॉली से एक-एक कर शव उतारे गए और पहले गांव के बाग में रखे गए। एक साथ पांच शवों को देखकर लोगों का कलेजा कांप उठा। दंपती के दोनों पक्षों के रिश्तेदारों के अलावा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद थे। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सन्नाटे को केवल चीत्कार ही तोड़ रही थी।
अंतिम संस्कार की तैयारियां तत्काल शुरू की गईं। सत्यवीर और उनकी पत्नी रामश्री का अंतिम संस्कार खेत के पास एक ही चिता पर किया गया। सत्यवीर के छोटे भाई देशराज ने दोनों को मुखाग्नि दी। वहीं तीनों बच्चों—बेटियां प्राची, अमरवती और छोटे बेटे—को गांव के तालाब किनारे गड्ढा खोदकर दफनाया गया। एक साथ पांच शवों का अंतिम संस्कार देख हर आंख से आंसू बह निकले।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन भी सतर्क रहा। पोस्टमार्टम के बाद जब शव गांव लाए गए, तब पुलिस बल भी साथ मौजूद रहा। पुलिस अधीक्षक अंकिता शर्मा के निर्देश पर अमांपुर थाने की पुलिस अंतिम संस्कार तक गांव में तैनात रही, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो।
ग्रामीणों के अनुसार सत्यवीर स्वाभिमानी और मेहनती व्यक्ति थे। वह अमांपुर में वेल्डिंग की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। गांव नगला भोजराज के बुजुर्ग ओमप्रकाश ने बताया कि सत्यवीर का व्यवहार अत्यंत अच्छा था और गांव में उनकी इज्जत की जाती थी। नगला गुलरिया निवासी भाजपा नेता बृजेश वर्मा ने भी उन्हें मेहनती और खुद्दार बताया। पास के गांव टिकुरिया के वृद्ध राजाराम ने कहा कि सत्यवीर अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए हर संभव प्रयास करते थे।
बताया गया कि सत्यवीर के तीनों बच्चे मेधावी थे और पढ़ाई में अच्छा प्रदर्शन करते थे। बेटी आकांक्षा ने इसी वर्ष प्रतिष्ठित शैक्षणिक पहल विद्याज्ञान की प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण की थी। सत्यवीर बच्चों की स्कूल फीस समय पर जमा करते थे और उनके बेहतर भविष्य के सपने देखते थे। स्कूल के प्रधानाचार्य के अनुसार चार दिन पहले प्राची स्कूल ड्रेस में घर के बाहर मिली थी। पूछने पर उसने बताया था कि पापा ने उसे स्कूल जाने से रोक दिया है। इस बात को लेकर जब सत्यवीर से पूछा गया तो वह बिना कुछ कहे चले गए थे।
ग्रामीणों में तरह-तरह की चर्चाएं हैं, लेकिन हर जुबान पर एक ही सवाल है—आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक स्वाभिमानी पिता ने अपने ही परिवार के साथ इतना बड़ा कदम उठा लिया? आर्थिक तंगी और बेटे की बीमारी को घटना की प्रमुख वजह माना जा रहा है, हालांकि पुलिस पूरे मामले की गहन जांच में जुटी है।
इस दर्दनाक घटना ने न केवल नगला भोजराज बल्कि पूरे क्षेत्र को गहरे शोक में डुबो दिया है। गांव में अब भी मातम पसरा हुआ है और लोग इस त्रासदी को याद कर सिहर उठते हैं।


