नई दिल्ली: भारत के संसदीय संबंधों को वैश्विक स्तर पर और सशक्त बनाने के उद्देश्य से 60 से अधिक देशों के साथ संसदीय मैत्री समूहों का गठन किया है। इस पहल को अंतर-संसदीय संवाद और लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूती देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
इन मैत्री समूहों का उद्देश्य भारतीय सांसदों को विभिन्न देशों की संसदों के सदस्यों के साथ प्रत्यक्ष और नियमित संवाद का अवसर प्रदान करना है। इससे अनुभवों का आदान-प्रदान, आपसी समझ और विश्वास में वृद्धि होगी तथा द्विपक्षीय संबंधों को नया आयाम मिलेगा।
सभी दलों की भागीदारी, लोकतंत्र की मजबूती
मैत्री समूहों में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के वरिष्ठ सांसदों को शामिल किया गया है। इनमें रवि शंकर प्रसाद, डॉ. एम. थंबीदुरई, पी. चिदंबरम, प्रो. राम गोपाल यादव, टी.आर. बालू, डॉ. काकोली घोष दस्तीदार, गौरव गोगोई, कनिमोझी करुणानिधि, मनीष तिवारी, डेरेक ओ’ब्रायन, अभिषेक बनर्जी, असदुद्दीन ओवैसी, अखिलेश यादव, के.सी. वेणुगोपाल, राजीव प्रताप रूडी, सुप्रिया सुले, संजय सिंह, बैजयंत पांडा, डॉ. शशि थरूर, डॉ. निशिकांत दुबे, अनुराग सिंह ठाकुर, भर्तृहरि महताब, डॉ. (सुश्री) डी. पुरंदेश्वरी, संजय कुमार झा, हेमा मालिनी, बिप्लब कुमार देब, डॉ. सुधांशु त्रिवेदी, जगदंबिका पाल, डॉ. सस्मित पात्रा, अपराजिता सारंगी, श्रीकांत एकनाथ शिंदे, पी.वी. मिधुन रेड्डी और प्रफुल्ल पटेल सहित अनेक नेता शामिल हैं।
यह पहल इस बात का संकेत है कि भारत की संसद दलीय राजनीति से ऊपर उठकर वैश्विक मंच पर एकजुट और परिपक्व लोकतंत्र का परिचय देना चाहती है।
किन-किन देशों के साथ बने समूह
जिन देशों के साथ मैत्री समूह गठित किए गए हैं, उनमें श्रीलंका, जर्मनी, न्यूज़ीलैंड, स्विट्ज़रलैंड, दक्षिण अफ्रीका, भूटान, सऊदी अरब, इज़राइल, मालदीव, अमेरिका, रूस, यूरोपीय संसद, दक्षिण कोरिया, नेपाल, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, जापान, इटली, ओमान, ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, सिंगापुर, ब्राज़ील, वियतनाम, मेक्सिको, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात सहित 60 से अधिक देश शामिल हैं।
संसदीय कूटनीति को नई दिशा
लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हमेशा इस बात पर बल दिया है कि संसदीय कूटनीति भारत की वैश्विक पहचान को सुदृढ़ बनाती है। उनके नेतृत्व में संसद ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर सक्रिय भागीदारी निभाई है और भारत को एक आत्मविश्वासी एवं जिम्मेदार लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत किया है।
इन मैत्री समूहों के माध्यम से व्यापार, तकनीक, सामाजिक नीति, संस्कृति और वैश्विक चुनौतियों जैसे विषयों पर भी संवाद को बढ़ावा मिलेगा। अध्ययन यात्राओं, संयुक्त बैठकों और नियमित संपर्क के जरिए दीर्घकालिक सहयोग को मजबूत किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विभिन्न देशों में बहुदलीय शिष्टमंडल भेजकर भारत की एकजुटता का संदेश दिया था। उसी दिशा में लोक सभा द्वारा 60 से अधिक देशों के साथ मैत्री समूहों का गठन एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
पहले चरण में 60 से अधिक देशों के साथ समूह बनाए गए हैं, जबकि निकट भविष्य में अन्य देशों के साथ भी ऐसे मैत्री समूह गठित किए जाने की तैयारी है। इस पहल से भारत की संसद विश्व की संसदों के बीच सेतु के रूप में अपनी भूमिका को और सशक्त करेगी।


