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Thursday, February 12, 2026

सहकारी समितियों की समीक्षा, 15 मार्च तक सभी बी-पैक्स को ई-पैक्स घोषित करने का निर्देश

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मैनपुरी। जनपद में सहकारी समितियों के सुदृढ़ीकरण और कंप्यूटरीकरण की दिशा में जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। जिलाधिकारी अंजनी कुमार सिंह ने जिला स्तरीय डिस्ट्रिक को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कमेटी तथा सहकारी समितियों के कंप्यूटरीकरण से संबंधित जिला स्तरीय क्रियान्वयन समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता, सचिव और मुख्य कार्यपालक अधिकारी को एम-पैक्स के गठन में तेजी लाने और किसी भी प्रकार की ढिलाई न बरतने के निर्देश दिए।
बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने स्पष्ट कहा कि प्रथम और द्वितीय चरण में आने वाले सभी बी-पैक्स को हर हाल में 15 मार्च तक ई-पैक्स घोषित किया जाए। उन्होंने सहकारी समितियों की सुस्ती पर नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
समीक्षा में सहायक निबंधक सहकारिता ने बताया कि जनपद की प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो बी-पैक्स के गठन का लक्ष्य निर्धारित है। वर्तमान में जनपद में 58 बी-पैक्स समितियां संचालित हैं। इस वर्ष बी-पैक्स उन्नयन योजना के तहत शासन द्वारा 44 नई समितियों के गठन का लक्ष्य दिया गया था, जिसके सापेक्ष अब तक 42 नई बी-पैक्स समितियों का गठन किया जा चुका है।
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि गठित समितियों में से 24 समितियां प्रथम चरण, 11 समितियां द्वितीय चरण और 22 समितियां तृतीय चरण में ई-पैक्स घोषित की जानी हैं। इनमें से 8 समितियों की सभी औपचारिकताएं पूर्ण कर ली गई हैं और समिति के अनुमोदन के बाद उन्हें ई-पैक्स घोषित कर दिया जाएगा। सचिव एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी ने जानकारी दी कि कंप्यूटरीकरण के प्रथम और द्वितीय चरण में कुल 35 समितियां चयनित की गई हैं, जिनमें से 8 समितियों का ऑडिट और पार्किंग अकाउंट की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है।
बैठक में अन्न भंडारण योजना की भी समीक्षा की गई। सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने बताया कि जिला सहकारी विकास संघ के लंबे समय से बंद पड़े शीतगृह की खाली भूमि पर 2500 मीट्रिक टन क्षमता का गोदाम यू.पी.आर.एन.एस.एस. द्वारा निर्मित किया जाना प्रस्तावित है। इस पर जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि जर्जर शीतगृह भवन और पुरानी मशीनरी का नियमानुसार निस्तारण कराया जाए। साथ ही शेष भूमि पर भी 2500 मीट्रिक टन क्षमता के एक और गोदाम के निर्माण की आवश्यक कार्यवाही शीघ्र प्रारंभ की जाए।
जिलाधिकारी ने कहा कि सहकारी क्षेत्र को मजबूत बनाने और किसानों को बेहतर भंडारण सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सभी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

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