बांदा। जनपद में अवैध मौरंग खनन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। स्थानीय लोगों और सूत्रों के अनुसार खप्टिहा 56/2 क्षेत्र में रात के अंधेरे में खुलेआम मौरंग खनन कराया जा रहा है। आरोप है कि केन नदी के किनारे रातभर पोकलैंड मशीनें चलती रहीं, जबकि प्रशासन कथित तौर पर मूकदर्शक बना रहा।
खनन से जुड़े पर्यावरणीय नियमों के तहत राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने रात में खनन गतिविधियों पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसके बावजूद बांदा में नियमों की अनदेखी के आरोप लग रहे हैं। तस्वीरों और स्थानीय चश्मदीदों के बयानों में रात के समय भारी मशीनों के संचालन की बात कही जा रही है।
संरक्षण और मिलीभगत के आरोप
सूत्रों का दावा कि कुछ प्रभावशाली लोगों को खुला संरक्षण मिला हुआ है और इसी के बल पर अवैध खनन बेखौफ जारी है। आरोप यह भी हैं कि पैलानी क्षेत्र के प्रशासनिक अधिकारियों और खनन विभाग के जिम्मेदारों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है। हालांकि प्रशासन की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई ठोस और सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
पर्यावरण और सुरक्षा पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि केन नदी में अवैध मौरंग खनन से नदी का प्राकृतिक प्रवाह प्रभावित होता है, तटों का कटाव बढ़ता है और आसपास के गांवों की सुरक्षा पर खतरा पैदा होता है। रात में खनन से दुर्घटनाओं की आशंका भी कई गुना बढ़ जाती है।
स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि यदि एनजीटी के नियम स्पष्ट हैं, तो फिर रात में खनन कैसे हो रहा है? क्या निगरानी तंत्र विफल है या फिर जानबूझकर आंखें मूंदी जा रही हैं? लोगों ने मांग की है कि पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो।
फिलहाल यह मामला बांदा में अवैध खनन, पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक जवाबदेही—तीनों पर बड़े सवाल खड़े करता है। जरूरत इस बात की है कि नियमों का सख्ती से पालन हो, रात में चल रहे कथित अवैध खनन पर तत्काल रोक लगे और पारदर्शी जांच के जरिए सच्चाई सामने आए।






