फर्रुखाबाद। जिले में इन दिनों सुबह और शाम के समय तेजी से बदलता मौसम आम जनमानस के स्वास्थ्य पर भारी पड़ सकता है। कभी तेज धूप, कभी घने बादल, तो कभी हल्की बरसात और ठंडी हवाओं के चलते तापमान में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। इस अस्थिर मौसम ने शरीर के ताप संतुलन को बिगाड़ दिया है, जिससे सर्दी-खांसी, जुकाम, बुखार और अन्य संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा बढ़ता जा रहा है। चिकित्सकों ने ऐसे मौसम में लोगों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी है।

चिकित्सकों का कहना है कि मौसम में जब-जब बदलाव होता है, तब तक स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं सामने आती ही हैं, लेकिन इस बार परिवर्तन कुछ ज्यादा ही अनियमित नजर आ रहा है। कड़ाके की सर्दी के बाद अब फागुन का महीना दस्तक दे चुका है, लेकिन मौसम पूरी तरह से स्थिर नहीं हो पाया है। दिन में हल्की गर्मी का एहसास होता है, जबकि सुबह और शाम ठंडक बनी रहती है। ऐसे में लोग जल्दबाजी में गर्म कपड़े छोड़ देते हैं, जो आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है।

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि अभी एकदम से कपड़े कम करना ठीक नहीं है। मौसम कब पलटी मार जाए, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। अचानक ठंडी हवा चलने लगती है या हल्की बारिश हो जाती है, जिससे शरीर सीधे तौर पर प्रभावित होता है। ऐसी स्थिति में सर्दी सीने में बैठने का खतरा बढ़ जाता है, जो आगे चलकर गंभीर समस्याओं का रूप ले सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के मौसम में वायरल संक्रमण, गले में खराश, सांस संबंधी दिक्कतें और बुखार के मामले बढ़ जाते हैं। खासतौर पर बच्चों और बुजुर्गों के लिए यह मौसम परिवर्तन अधिक खतरनाक साबित हो सकता है, क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी उन्हें लंबे समय तक बीमार कर सकती है।

चिकित्सकों ने सलाह दी है कि लोग सुबह-शाम हल्के गर्म कपड़े अवश्य पहनें, ठंडी हवा से बचाव करें और भीगने से परहेज करें। खान-पान में संतुलन बनाए रखें, गर्म पानी का सेवन करें और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आहार को प्राथमिकता दें। इसके साथ ही यदि सर्दी, खांसी या बुखार के लक्षण दिखाई दें तो स्वयं इलाज करने के बजाय चिकित्सक से परामर्श लेना बेहतर होगा।

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