लखनऊ। प्रदेश के पिछड़े विकास खंडों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को गति देने के उद्देश्य से मंगलवार को लोक भवन में आकांक्षात्मक विकास खंड कार्यक्रम की गहन समीक्षा की गई। मुख्य सचिव एसपी गोयल की अध्यक्षता में हुई बैठक में विभागवार प्रगति, निर्धारित इंडिकेटर्स की स्थिति और जमीनी स्तर पर सामने आ रही चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा हुई।
मुख्य सचिव ने बताया कि प्रदेश के 42 जिलों में कुल 68 आकांक्षात्मक विकास खंड चिन्हित किए गए हैं। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, पोषण, बुनियादी ढांचा और सामाजिक विकास जैसे प्रमुख क्षेत्रों में तेज और ठोस प्रगति सुनिश्चित की जाए, ताकि योजनाओं का लाभ समयबद्ध रूप से अधिकतम पात्र लाभार्थियों तक पहुंच सके।
उन्होंने कहा कि जिन इंडिकेटर्स में आकांक्षात्मक विकास खंडों की प्रगति अभी भी राज्य औसत से कम है, वहां जिला और विकास खंड स्तर पर बेहतर समन्वय के साथ लक्षित कार्ययोजना बनाई जाए। साथ ही पोर्टल पर त्रुटिरहित डेटा फीडिंग, सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की शत-प्रतिशत तैनाती तथा नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।
मुख्य सचिव ने जिला व विकास खंड स्तर पर त्रैमासिक समीक्षा बैठकों, फ्रंटलाइन वर्कर्स के नियमित प्रशिक्षण और ब्लॉक डेवलपमेंट स्ट्रेटजी (बीडीएस) को अद्यतन करने पर भी विशेष जोर दिया। इसके अलावा संबंधित विभागों को 50 निर्धारित इंडिकेटर्स का डेटा एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (एपीआई) के माध्यम से नियोजन विभाग के पोर्टल पर समय से उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश कुमार मेश्राम, प्रमुख सचिव नियोजन आलोक कुमार, प्रमुख सचिव ग्राम्य विकास सौरभ बाबू सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।



