3 बीमा कंपनी कर्मी, 9 बैंक अधिकारी और 32 किसानों पर एफआईआर
फर्रुखाबाद। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत रबी विपणन वर्ष 2024-25 में फर्रुखाबाद जनपद में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता का सनसनीखेज मामला सामने आया है। जांच में लगभग 68 लाख रुपये के फर्जी बीमा क्लेम भुगतान का खुलासा हुआ है। इस मामले में बीमा कंपनी के 3 कर्मियों, विभिन्न बैंकों के 9 अधिकारियों व कर्मचारियों तथा 32 किसानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जांच में पाया गया कि जिन किसानों को फसल बीमा का मुआवजा दिया गया, उनके पास संबंधित गांवों में कृषि भूमि ही नहीं थी, इसके बावजूद नियमों को ताक पर रखकर लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया।
दो गांवों में 43 लाख का फर्जी भुगतान
उप कृषि निदेशक अरविंद मोहन मिश्र द्वारा कराई गई जांच में सामने आया कि चकबंदी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम बलीपट्टी रानीगांव में 15 किसानों को कुल 25.15 लाख रुपये का बीमा भुगतान किया गया, जबकि इनमें से 14 किसानों के पास गांव में कोई भूमि नहीं पाई गई। केवल एक किसान के पास महज 0.026 हेक्टेयर भूमि थी, फिर भी उसे तय मानक से अधिक, लगभग 23 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान कर दिया गया।
इसी तरह ग्राम पंचायत गुडेरा में 7 किसानों को 18.37 लाख रुपये का बीमा क्लेम दिया गया, जबकि जांच में यह स्पष्ट हुआ कि इन सातों किसानों के पास भी संबंधित ग्राम में कोई जमीन नहीं थी। इस प्रकार दोनों गांवों में कुल करीब 43 लाख रुपये का भुगतान पूरी तरह नियमों के विरुद्ध किया गया।
बंथलशाहपुर में 25.71 लाख का घोटाला
थाना जहानगंज क्षेत्र के ग्राम बंथलशाहपुर में भी फसल बीमा में गंभीर अनियमितता सामने आई। यहां 13 किसानों को 25,71,610 रुपये का बीमा क्लेम दिया गया। जांच रिपोर्ट के अनुसार किसान दीपक यादव को देय राशि 59,328.65 रुपये थी, जबकि उसे 2,32,626 रुपये का भुगतान किया गया, जिससे 1,73,297.35 रुपये अतिरिक्त दिए गए।
इसी प्रकार सरला देवी यादव को देय 59,294.10 रुपये के स्थान पर 1,85,632 रुपये का भुगतान किया गया, जिससे 1,26,337.90 रुपये अधिक भेजे गए। केवल इन दो किसानों को ही कुल 2,99,635.25 रुपये अतिरिक्त भुगतान किया गया। वहीं शेष 11 किसानों को 24,52,987.25 रुपये नियमों की अनदेखी करते हुए दे दिए गए।
बीमा कंपनी और बैंकों की मिलीभगत उजागर
जिलाधिकारी के आदेश पर गठित तहसील स्तरीय जांच समिति, चकबंदी अधिकारियों और संबंधित विभागों की संयुक्त रिपोर्ट में इस पूरे मामले को गंभीर वित्तीय अनियमितता करार दिया गया है। जांच में एचडीएफसी एरगो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के प्रतिनिधियों और कई बैंकों के अधिकारियों की मिलीभगत सामने आई है।
जांच रिपोर्ट के अनुसार बीमा कंपनी के प्रतिनिधि प्रवीन पाल, विकास कुमार और अरुण कुमार, साथ ही बैंक ऑफ इंडिया, आर्यावर्त बैंक, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और यूनियन बैंक की संबंधित शाखाओं के तत्कालीन शाखा प्रबंधक और कर्मचारी दोषी पाए गए हैं।
थाने में दर्ज हुई एफआईआर
उपनिदेशक कृषि अरविंद मोहन मिश्र की तहरीर पर थाना अमृतपुर और थाना जहानगंज में संबंधित धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। पुलिस ने मामले की विवेचना शुरू कर दी है और जल्द ही आरोपियों से पूछताछ व आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन सख्त, रिकवरी की तैयारी
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार दोषियों से गलत तरीके से प्राप्त धनराशि की वसूली के साथ-साथ विभागीय और कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस घोटाले के सामने आने के बाद फसल बीमा योजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।






