इंडिगो की उड़ानों में बड़ी कटौती, सरकार एक्शन में; एयरपोर्ट पर अधिकारियों की तैनाती के निर्देश

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– 7 दिन में 4,500 से ज्यादा फ्लाइटें रद्द, स्लॉट घटाने पर विचार

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो द्वारा बीते सात दिनों में 4,500 से अधिक उड़ानें रद्द किए जाने के बाद केंद्र सरकार एक्शन मोड में आ गई है। यात्रियों को हो रही भारी परेशानियों को देखते हुए नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाते हुए एयरपोर्ट्स पर वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती के आदेश जारी किए हैं, ताकि ऑपरेशंस की निगरानी की जा सके और यात्रियों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
जानकारी के अनुसार, इंडिगो ने पिछले एक हफ्ते में औसतन 650 से 700 उड़ानें प्रतिदिन रद्द की हैं। इससे अनुमानित 7 से 8 लाख यात्री प्रभावित हुए हैं। कई बड़े एयरपोर्ट—दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद—में सबसे ज्यादा उड़ानें प्रभावित हुईं।
नागरिक उड्डयन मंत्रालय इंडिगो द्वारा निर्धारित उड़ानों के अनुसार सेवा न दे पाने को गंभीर मान रहा है। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार
खाली किए गए स्लॉट्स अन्य एयरलाइंस जैसे एयर इंडिया, विस्तारा, स्पाइसजेट और अकासा को दिए जा सकते हैं, ताकि हवाई सेवाएं प्रभावित न हों।
DGCA ने इंडिगो से विस्तृत कारण, पायलटों की उपलब्धता, क्रू की कमी और ऑपरेशनल डेटा 48 घंटे के भीतर जमा करने को कहा है।
सरकार ने संबंधित एयरपोर्ट्स पर वरिष्ठ अधिकारियों को तैनात करने का आदेश दिया है, जिनकी जिम्मेदारियाँ होंगी।
उड़ानों की स्थिति की रियल-टाइम मॉनिटरिंग के साथ
यात्रियों की शिकायतों का तुरंत समाधान, और
एयरलाइंस की ओर से उचित मुआवजा और रिस्केड्यूलिंग सुनिश्चित करना है।
इंडिगो के अनुसार कंपनी पायलटों और क्रू की कमी से जूझ रही है। बताया जा रहा है कि,
करीब 120–150 पायलटों ने एक साथ मेडिकल लीव ले ली।
कंपनी के पास कुल लगभग 3,000 पायलट हैं, जिनमें से कई स्टाफिंग शेड्यूल को पूरा नहीं कर पाए
अचानक आई कमी के कारण बड़ी संख्या में उड़ानें रोकनी पड़ीं।
इंडिगो का कहना है कि वह स्थिति को जल्द सामान्य करने के लिए पायलटों की शेड्यूलिंग दोबारा कर रही है और नए पायलटों की भर्ती प्रक्रिया तेज की गई है।
सरकार ने साफ कर दिया है कि यात्रियों को होने वाली असुविधा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी, और आवश्यकता पड़ी तो इंडिगो पर कड़ी कार्रवाई भी की जा सकती है।

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