लखनऊ। उत्तर प्रदेश कैबिनेट ने मंगलवार देर रात कई अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बाई सर्कुलेशन बैठक में उद्योग, शिक्षा, न्याय और परिवहन से जुड़े कई बड़े निर्णय लिए गए। इन फैसलों से जहां व्यापारियों और उद्यमियों को राहत मिली है, वहीं सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में भी स्पष्टता आई है।
कैबिनेट ने बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग में समूह क और समूह ख के पदों की शैक्षिक अर्हता तय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। अब जिला कार्यक्रम अधिकारी के पद के लिए समाजशास्त्र, मानवशास्त्र, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान, गृह विज्ञान या समाज कार्य में स्नातक उपाधि आवश्यक होगी। वहीं बाल विकास परियोजना अधिकारी के लिए समाजशास्त्र, समाज कार्य या गृह विज्ञान में स्नातक की अर्हता अनिवार्य की गई है।
सरकार ने व्यापार जगत के लिए भी बड़ा कदम उठाते हुए “उत्तर प्रदेश सुगम व्यापार (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश-2025” को मंजूरी दी है। इसके तहत राज्य के 13 प्रमुख औद्योगिक और व्यापारिक अधिनियमों में लगभग 99 प्रतिशत आपराधिक प्रावधान समाप्त कर दिए गए हैं। अब मामूली उल्लंघन पर जेल के बजाय आर्थिक दंड या चेतावनी दी जाएगी। फैक्ट्री अधिनियम, दुकान एवं वाणिज्यिक प्रतिष्ठान अधिनियम, मोटर ट्रांसपोर्ट वर्कर्स एक्ट, बोइलर अधिनियम और अनुबंध श्रमिक अधिनियम जैसे कानूनों में संशोधन किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत सभी लाइसेंस और पंजीकरण प्रक्रियाएं पूरी तरह डिजिटल होंगी, जबकि निरीक्षण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनाई जाएगी ताकि भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम हों। सरकार का कहना है कि यह कदम ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देगा और निवेश के माहौल को और अनुकूल बनाएगा।
कैबिनेट ने इसके साथ ही काशी नरेश राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय ज्ञानपुर, भदोही का नाम बदलकर “काशी नरेश महाविद्यालय भदोही” करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। इसके लिए राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम में संशोधन किया गया है।
इसके अलावा इलाहाबाद उच्च न्यायालय में विभिन्न श्रेणियों के 274 पदों के सृजन को भी स्वीकृति दी गई है, जिनमें समीक्षा अधिकारी, अनुभाग अधिकारी, निबंधक और सहायक निबंधक के पद शामिल हैं।
परिवहन विभाग को रायबरेली के ऊंचाहार में बस स्टैंड निर्माण के लिए ग्राम पट्टी रहस कैध्वल में निशुल्क भूमि देने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी गई। साथ ही प्रदेश में धान और गेहूं की खरीद के लिए ई-पॉप मशीनों की व्यवस्था का जिम्मा यूपी डेस्को को सौंपा गया है।
सरकार के इन फैसलों को प्रदेश के विकास, प्रशासनिक पारदर्शिता और उद्योग जगत की प्रगति की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।






