लखनऊ। न्यायालयों में लंबित मुकदमों और सामाजिक एवं पारिवारिक विवादों को आपसी सहमति से सुलझाने के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए शनिवार को योगेश्वर ऋषिकुल इंटर कॉलेज में विशेष विधिक जागरूकता एवं मध्यस्थता शिविर आयोजित किया गया। सर्वोच्च न्यायालय के तत्वावधान और मध्यस्थता एवं सुलह समिति की पहल पर चलाए जा रहे ‘मध्यस्थता फॉर द नेशन 3.0’ अभियान के अंतर्गत आयोजित कार्यक्रम में लोगों को मध्यस्थता के माध्यम से विवादों का शांतिपूर्ण समाधान प्राप्त करने की प्रक्रिया समझाई गई।
कार्यक्रम में सिविल जज (सीनियर डिवीजन) एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के सचिव कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा तथा इलाहाबाद उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (जे), स्टेशनरी भगीरथ वर्मा ने लोगों को मध्यस्थता के महत्व और इससे मिलने वाले कानूनी लाभों की जानकारी दी।
रजिस्ट्रार भगीरथ वर्मा ने बताया कि 1 अक्टूबर से 30 दिसंबर 2026 तक संचालित इस अभियान के अंतर्गत पक्षकार अपने लंबित दीवानी, वैवाहिक, मोटर दुर्घटना दावा और अन्य समझौता योग्य मामलों को आपसी सुलह के लिए मध्यस्थता में भेज सकते हैं। इसका उद्देश्य विवादों का समाधान बातचीत और सहमति के आधार पर कराना तथा न्यायालयों में लंबित मामलों के बोझ को कम करने में सहयोग देना है।
उन्होंने लोगों को अभियान का लाभ उठाने और विवादों के समाधान के लिए उपलब्ध कानूनी विकल्पों की जानकारी प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
न्यायिक अधिकारी कुंवर मित्रेश सिंह कुशवाहा ने सामाजिक सौहार्द और आपसी संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि ‘संवाद से सुलझेंगे विवाद’ ही इस अभियान की मूल भावना है। लंबे समय तक मुकदमे चलने से पक्षकारों का समय और धन खर्च होता है। इसके विपरीत मध्यस्थता में दोनों पक्ष अपनी बात रखते हुए आपसी सहमति से समाधान तक पहुंच सकते हैं।
उन्होंने बताया कि मध्यस्थता का उद्देश्य विवाद में किसी एक पक्ष की जीत सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि ऐसा समाधान तलाशना है जिसे दोनों पक्ष स्वीकार कर सकें।
शिविर में उपस्थित सैकड़ों स्थानीय नागरिकों को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से उपलब्ध निःशुल्क विधिक सहायता और मध्यस्थता सेवाओं की जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि न्यायालयों में लंबित मामलों के समाधान के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत मध्यस्थता का विकल्प अपनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में यह भी बताया गया कि निचली अदालतों से संबंधित मामलों के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण तथा उच्च न्यायालय से संबंधित मामलों के लिए उच्च न्यायालय की विधिक सेवा समिति से संपर्क किया जा सकता है।
शिविर के माध्यम से लोगों को जागरूक करते हुए यह संदेश दिया गया कि आपसी बातचीत, सहमति और सहयोग से अनेक विवादों का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। मध्यस्थता न केवल पक्षकारों के बीच संबंधों को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।


