लखनऊ। रबी सीजन की बोवाई से पहले खाद की कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए कृषि विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है। सीमावर्ती जिलों में विशेष टीमें तैनात की गई हैं। विभाग के अनुसार, अप्रैल से अब तक भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में 14 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई है, जबकि प्रदेशभर में 16 हजार से अधिक खाद की दुकानों की जांच की गई है। गड़बड़ी मिलने पर 315 दुकानदारों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं।
एक से 12 अक्तूबर के बीच प्रदेश में 2.49 लाख मीट्रिक टन खाद वितरित की गई। वहीं, गोदामों में 33.10 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध है। विभाग ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा और नेपाल सीमा से जुड़े जिलों में निगरानी बढ़ाई है। प्रदेश मुख्यालय के अधिकारी भी संबंधित जिलों में जाकर खाद की उपलब्धता और खपत की समीक्षा करेंगे। गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।
विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, भारत-नेपाल सीमा से लगे जिलों में दर्ज मामलों में पीलीभीत के दो, महराजगंज के चार, सिद्धार्थनगर के सात और श्रावस्ती का एक व्यक्ति शामिल है। प्रदेशभर में जांच के दौरान 48 लोगों के खिलाफ विभिन्न मामलों में रिपोर्ट भी दर्ज कराई गई है।
कृषि विभाग के अनुसार, प्रदेश में 16.14 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.91 लाख डीएपी, 5.44 लाख एनपीके, 4.12 लाख एसएसपी और 1.49 लाख मीट्रिक टन पोटाश उपलब्ध है। पिछले वर्ष की तुलना में इस बार 8.43 लाख मीट्रिक टन अधिक खाद उपलब्ध होने का दावा किया गया है। पांच रैक खाद रास्ते में हैं, जो जल्द विभिन्न जिलों में पहुंचेंगी।
संयुक्त निदेशक (उर्वरक) डॉ. हरेंद्र मिश्रा ने कहा कि रबी सीजन के लिए पर्याप्त खाद उपलब्ध है। किसानों को जरूरत के अनुसार ही खाद खरीदनी चाहिए। विभाग कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए कार्रवाई जारी रखेगा।
यूपी में खाद की कालाबाजारी रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में टीमें तैनात


