शिकायत के निर्देश
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने सीबीआई के छह अधिकारियों के खिलाफ कथित रूप से अदालत के समक्ष झूठा बयान देने और गलत तथ्य पेश करने के मामले में आपराधिक शिकायत दर्ज कराने का आदेश दिया है। अदालत ने संबंधित स्पेशल जज को निर्देश दिया है कि शिकायत को चार सप्ताह के भीतर क्षेत्राधिकार वाले मजिस्ट्रेट के समक्ष भेजा जाए।
मामला पूर्व भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी अशोक कुमार अग्रवाल से जुड़ा है। सीबीआई ने उनके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई की थी। जनवरी 2016 में दिल्ली हाईकोर्ट ने अभियोजन की मंजूरी को अमान्य माना, जिसके बाद मार्च 2016 में विशेष अदालत ने अग्रवाल को डिस्चार्ज कर दिया था।
इसके बाद मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने की संभावना पर विचार हुआ। जून 2016 में कानून मंत्रालय ने मामले को उच्चतर अदालत में ले जाने के लिए पर्याप्त आधार नहीं होने की राय दी थी। यह राय 1 जुलाई 2016 को DoPT के माध्यम से सीबीआई को भेजी गई थी।
अग्रवाल ने जांच के दौरान जब्त किए गए दस्तावेज वापस करने की मांग की। इस पर 2 अगस्त 2016 को सीबीआई ने अदालत में जवाब दाखिल करते हुए कहा कि आगे की कानूनी कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है और कुछ दस्तावेज आगे की कानूनी कार्यवाही में जरूरी हो सकते हैं।
अग्रवाल ने इस बयान को गलत बताते हुए सीआरपीसी की धारा 340 के तहत कार्रवाई की मांग की। उनका कहना था कि जिस तारीख को सीबीआई ने अदालत में पत्राचार चलने की बात कही, उस समय ऐसा कोई पत्राचार वास्तव में नहीं चल रहा था।
हाईकोर्ट ने सीबीआई की फाइलों, नोटिंग और जवाब के अलग-अलग ड्राफ्ट की जांच की। अदालत के मुताबिक, एक शुरुआती ड्राफ्ट में यह दर्ज था कि DoPT ने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दाखिल करने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।
बाद के ड्राफ्ट में इस तथ्य को हटा दिया गया और हाथ से यह बात जोड़ी गई कि प्रशासनिक मंत्रालय के साथ पत्राचार चल रहा है। अदालत ने माना कि यह केवल शब्दों की गलती नहीं थी, बल्कि इससे अदालत के सामने प्रस्तुत की जा रही वास्तविक स्थिति बदल गई।
हाईकोर्ट के आदेश में जिन छह सीबीआई अधिकारियों के खिलाफ शिकायत आगे बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, उनमें सुशील दीवान,विनीत विनायक,अमित कुमार,रमन त्यागी,प्रेम कुमार गौतम,मोहम्मद आजाद शामिल हैं।
अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड में इन अधिकारियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 191, 193 और 209 के तहत आरोपों की जांच के लिए पर्याप्त प्रथमदृष्टया आधार है। इनमें झूठे साक्ष्य से जुड़े अपराध और अदालत के समक्ष गलत दावा करने से संबंधित प्रावधान शामिल हैं।
हालांकि, हाईकोर्ट का यह आदेश अधिकारियों को दोषी ठहराने का अंतिम फैसला नहीं है। अदालत ने केवल यह माना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर आपराधिक शिकायत और आगे की कानूनी जांच आवश्यक है। अब शिकायत मजिस्ट्रेट के समक्ष जाएगी, जहां कानून के अनुसार आगे की कार्यवाही होगी।
अदालत की अहम टिप्पणी
हाईकोर्ट ने माना कि किसी आंतरिक प्रस्ताव को ऐसा प्रस्तुत नहीं किया जा सकता कि जैसे संबंधित मंत्रालय के साथ वास्तविक पत्राचार पहले से चल रहा हो। अदालत के अनुसार, रिकॉर्ड में मौजूद लगातार ड्राफ्ट, फाइल नोटिंग और अंतिम जवाब मिलकर मामले की जांच के लिए “reasonable foundation” उपलब्ध कराते हैं।
यूथ इंडिया | नई दिल्ली
अदालत के आदेश के बाद अब छह CBI अधिकारियों की भूमिका की न्यायिक प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ेगी।


