नई दिल्ली: दिल्ली की द्वारका जिला अदालत ने उत्तम नगर (Uttam Nagar) के मोहन गार्डन इलाके में कुत्ते को लेकर हुई कहासुनी के बाद दो भाइयों पर चाकू से जानलेवा हमला करने के मामले में चार दोषियों को उम्रकैद की सजा (life imprisonment) सुनाई है। अदालत ने मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि सार्वजनिक स्थान पर चाकू से हमला कर किसी व्यक्ति के दिल और आंतों को क्षतिग्रस्त करना अत्यंत क्रूर कृत्य है। अदालत के अनुसार, इस तरह की हिंसक घटनाएं समाज में शांति और सौहार्द के लिए गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंकज गुप्ता की अदालत ने अंकित भारद्वाज, पारस भारद्वाज, देव चोपड़ा और करण अरोड़ा को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या के प्रयास) के तहत दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने सभी दोषियों पर एक-एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। अदालत ने पाया कि मामले का मुख्य आरोपी देव चोपड़ा पैरोल पर जेल से बाहर आने के बाद करीब साढ़े चार साल तक फरार रहा। इस आधार पर उसे IPC की धारा 174ए के तहत अलग से चार साल के कारावास और 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी सुनाई गई है।
कुत्ते को लेकर हुआ विवाद इतना बढ़ गया कि टेंपो चालक विजेंदर राणा की जान चली गई। अक्तूबर 2018 में घर लौट रहे विजेंदर को आरोपियों ने घेर लिया था। शोर सुनकर उनके भाई राजेश राणा और बेटे निखिल बीच-बचाव के लिए पहुंचे। इसी दौरान देव चोपड़ा ने चाकू से विजेंदर और राजेश पर हमला कर दिया। गंभीर चोटों के चलते विजेंदर की मौत हो गई।
अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि हमले में गंभीर रूप से घायल राजेश राणा का इलाज कर उनकी जान बचा ली गई। अतिरिक्त लोक अभियोजक वीके स्वामी ने दोषियों को किसी भी तरह की नरमी न देने की मांग की। अभियोजन के मुताबिक, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और एफएसएल की डीएनए रिपोर्ट ने मामले में अहम भूमिका निभाई। जांच के दौरान कार से बरामद चाकू पर मिले खून के नमूने का मिलान मृतक विजेंदर के सैंपल से हुआ, जिससे अभियोजन के साक्ष्यों को मजबूती मिली।


