राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी को टिकट
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर भाजपा ने सोमवार को अपने आठ प्रत्याशियों के नाम घोषित कर दिए। खास बात यह है कि पार्टी ने सभी मौजूदा राज्यसभा सदस्यों को दोबारा मौका नहीं दिया। केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा का भी टिकट कट गया है। वहीं, झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया गया है।
भाजपा की सूची में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश साफ नजर आ रही है। आठ प्रत्याशियों में दो ब्राह्मण, एक ठाकुर, तीन पिछड़ा वर्ग और दो दलित वर्ग से हैं। पिछड़े वर्ग में लोधी, कुर्मी और पाल समाज को प्रतिनिधित्व दिया गया है, जबकि दलित वर्ग में खटीक और पासी समाज से प्रत्याशी उतारे गए हैं।
पार्टी ने आंवला विधायक और योगी सरकार में पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, भाजपा पिछड़ा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, वरिष्ठ भाजपा नेता विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, भाजपा प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार को प्रत्याशी बनाया है।
मौजूदा राज्यसभा सांसद नीरज शेखर, सीमा द्विवेदी, बृजलाल, गीता शाक्य और अरुण सिंह को दोबारा टिकट नहीं मिला। डॉ. दिनेश शर्मा के अंडमान-निकोबार के उपराज्यपाल बनाए जाने के बाद उनका राज्यसभा से इस्तीफा हो चुका है। राज्यसभा की 31 सीटों वाले उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर 16 अक्टूबर को चुनाव होना है, जबकि नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है।
भाजपा की सूची को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरण साधने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। खासकर लोधी, पाल और कुर्मी समाज को प्रतिनिधित्व देने के साथ दलित वर्ग में पासी और खटीक समाज को जगह दी गई है। वहीं, दो ब्राह्मण प्रत्याशियों को शामिल कर पार्टी ने सवर्ण समीकरण को भी साधने का प्रयास किया है।
समाजवादी पार्टी के दो प्रत्याशी रामगोपाल यादव और धनराज परिमल नथवानी पहले ही नामांकन कर चुके हैं। यदि भाजपा अपना नौवां और सपा अपना तीसरा प्रत्याशी मैदान में नहीं उतारती है, तो भाजपा के आठ और सपा के दो प्रत्याशियों का निर्विरोध निर्वाचन तय माना जा रहा है।


