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Sunday, October 4, 2026

शिक्षा में बदलाव का दावा, अब गुणवत्ता की कसौटी पर परखने का समय

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उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर तकनीक, डिजिटल संसाधनों और विद्यार्थियों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने की चर्चा तेज हुई है। सरोजनीनगर के भाजपा विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में हुए बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा है कि विद्यार्थियों को लैपटॉप उपलब्ध कराने और तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में सरकार ने महत्वपूर्ण काम किया है।

यह बात अपनी जगह महत्वपूर्ण है कि आज की शिक्षा केवल किताबों और कक्षाओं तक सीमित नहीं रह गई है। डिजिटल युग में कंप्यूटर, इंटरनेट, ऑनलाइन अध्ययन सामग्री और तकनीकी दक्षता विद्यार्थियों की शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं। ऐसे में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के विद्यार्थियों तक डिजिटल संसाधनों की पहुंच बनाना निश्चित रूप से शिक्षा में अवसरों की समानता की दिशा में एक उपयोगी कदम हो सकता है।

लेकिन असली सवाल केवल यह नहीं है कि कितने विद्यार्थियों को लैपटॉप मिले। बड़ा सवाल यह है कि उन उपकरणों का उपयोग कितने विद्यार्थी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए कर पा रहे हैं? क्या ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पर्याप्त इंटरनेट सुविधा है? क्या शिक्षकों को डिजिटल शिक्षा के अनुरूप प्रशिक्षण मिल रहा है? क्या सरकारी स्कूलों में स्मार्ट कक्षाएं, प्रयोगशालाएं और पुस्तकालय नियमित रूप से संचालित हो रहे हैं?

शिक्षा में वास्तविक बदलाव का पैमाना किसी एक योजना या संसाधन से नहीं, बल्कि विद्यालयों की गुणवत्ता, शिक्षकों की उपलब्धता, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और शिक्षा के परिणामों से तय होता है।

उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में शिक्षा के क्षेत्र में सुधार की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है। एक ओर महानगरों और बड़े शहरों के विद्यालय तेजी से डिजिटल हो रहे हैं, वहीं दूसरी ओर अनेक ग्रामीण विद्यालय अभी भी बुनियादी सुविधाओं, पर्याप्त स्टाफ और संसाधनों की चुनौतियों से जूझते हैं। इसलिए डिजिटल शिक्षा के साथ-साथ प्राथमिक शिक्षा की नींव मजबूत करना भी उतना ही जरूरी है।

डॉ. राजेश्वर सिंह द्वारा मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप देकर प्रोत्साहित करने और डिजिटल लाइब्रेरी जैसी पहलों में भागीदारी का उल्लेख यह संकेत देता है कि जनप्रतिनिधियों की भूमिका केवल नीतियों पर चर्चा तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उन्हें अपने क्षेत्रों में शिक्षा की वास्तविक स्थिति को समझकर स्कूलों और विद्यार्थियों की जरूरतों के अनुरूप पहल करनी चाहिए।

विधायक ने कानून-व्यवस्था में सुधार और अपराधियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई का भी उल्लेख किया है। निश्चित रूप से सुरक्षित वातावरण विकास और शिक्षा दोनों के लिए आवश्यक है। लेकिन कानून-व्यवस्था की सफलता का मूल्यांकन भी केवल कठोर कार्रवाई से नहीं, बल्कि अपराध में कमी, नागरिकों की सुरक्षा की भावना और कानून के प्रति विश्वास से किया जाना चाहिए।

उत्तर प्रदेश में बदलाव की तस्वीर को लेकर राजनीतिक दावे अपनी जगह हैं, लेकिन जनता के लिए सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि इन बदलावों का वास्तविक लाभ उसके जीवन में कितना पहुंचा है।

लैपटॉप हाथ में आना बदलाव की शुरुआत हो सकता है, लेकिन उस लैपटॉप के जरिए बच्चे को बेहतर शिक्षा, बेहतर अवसर और बेहतर भविष्य मिलना ही बदलाव की असली सफलता होगी।

आज जरूरत ऐसे शिक्षा मॉडल की है, जिसमें तकनीक साधन बने, शिक्षक उसकी ताकत हों और विद्यार्थी उसके केंद्र में। उत्तर प्रदेश की नई पीढ़ी को केवल डिजिटल उपकरण नहीं, बल्कि ऐसी शिक्षा चाहिए जो उसे ज्ञान, कौशल, रोजगार और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे ले जाए।

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