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Thursday, October 1, 2026

श्रीराम मर्यादा और करुणा के सागर, भरत जैसा भाई दुनिया में नहीं : मानस विद्वान

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फर्रुखाबाद। श्री पाण्डेश्वर नाथ मंदिर (पण्डा बाग) स्थित सत्संग भवन, रेलवे रोड में चल रहे 38वें मानस सम्मेलन में मानस विद्वानों ने श्रीराम के जीवन चरित्र, भरत के त्याग और भारतीय संस्कृति में शास्त्रों के महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। विद्वानों ने कहा कि श्रीराम का जीवन परिवार, समाज और राष्ट्र के लिए आदर्श है तथा रामचरितमानस के प्रसंग आज भी मानव जीवन को सही दिशा देने में सक्षम हैं।
मानस विद्वान श्री प्रहलाद मिश्र (गोण्डा) ने गोस्वामी तुलसीदास रचित रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से श्रीराम के जीवन चरित्र का वर्णन किया। उन्होंने कहा कि परिवार में माता-पिता और गुरु का सम्मान तथा भाई-भाई के बीच प्रेम कैसा होना चाहिए, यह श्रीराम के जीवन से सीखा जा सकता है। उन्होंने भारतीय वैदिक परंपराओं और संस्कारों की व्याख्या करते हुए कहा कि मानस का अध्ययन और चिंतन करने से श्रीराम के आदर्श एवं गुण मनुष्य के जीवन में स्वतः उतरने लगते हैं। श्रीराम मर्यादा, अहिंसा, मानवता और सनातन धर्म के रक्षक के रूप में पूजनीय हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम प्रेम, मर्यादा और करुणा के सागर हैं तथा अपने भक्तों पर सदैव कृपा बनाए रखते हैं।
सुश्री लीला भारती (दतिया, मध्य प्रदेश) ने भरत चरित्र का वर्णन करते हुए मानस की चौपाई “सब बिधि भरत सराहन जोगू” का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भरत जैसा त्याग और भाई के प्रति प्रेम संसार में दुर्लभ है। वर्तमान समय में छोटी-छोटी बातों को लेकर परिवारों में विवाद और संघर्ष देखने को मिलता है, ऐसे में भरत का चरित्र समाज के लिए अनुकरणीय है। भरत ने सत्ता और संपत्ति का मोह त्यागकर श्रीराम के प्रति अपने प्रेम और समर्पण का परिचय दिया। उन्होंने कहा कि रामचरितमानस वर्तमान समय में भी मानव जीवन को संस्कार और दिशा देने वाला महत्वपूर्ण ग्रंथ है।
मानस विद्वान पं. पीलाराम (दुर्ग, छत्तीसगढ़) ने “शास्त्र सुचिंतित पुनि पुनि देखिअ…” प्रसंग के माध्यम से शास्त्रों के अध्ययन और चिंतन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि शास्त्रों का चिंतन मानव जीवन के विकास के साथ परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास में भी सहायक है। उन्होंने 38वें मानस सम्मेलन में मानस की चौपाइयों पर विद्वानों द्वारा किए जा रहे विचार-मंथन की सराहना करते हुए कहा कि नए भारत के निर्माण के लिए भारतीय संस्कृति, शास्त्रों और संस्कारों का अध्ययन आवश्यक है।
डॉ. रामबाबू पाठक ने सुंदरकांड में माता सीता और हनुमान के संवाद तथा आशीर्वचन का उल्लेख करते हुए कहा कि रामचरितमानस के बालकांड, अयोध्याकांड, अरण्यकांड और सुंदरकांड सहित प्रत्येक प्रसंग मानव जीवन, परिवार, समाज और राष्ट्र के निर्माण के लिए प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम के अंत में आरती एवं प्रसाद वितरण किया गया। इस दौरान सौम्य पाठक, विजय लक्ष्मी पाठक, अलका, माधुरी सक्सेना, मालती, शशी रस्तोगी, शुभी, रुपाली सहित बड़ी संख्या में महिला श्रद्धालु मौजूद रहीं। वहीं बृजकिशोर सिंह ‘किशोर’, डॉ. हेम सिंह, विशेष पाठक, अद्भुत, अशोक रस्तोगी, ज्योतिस्वरूप अग्निहोत्री, नरेश दुबे, विनय अवस्थी, सदानंद शुक्ला, विजय अवस्थी और सर्वेश अवस्थी आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन पं. रामेन्द्र नाथ मिश्र ने किया। आरती एवं प्रसाद वितरण के साथ कथा का विश्राम हुआ।

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