नई दिल्ली। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पूरा कर चुके राज्यों में मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में बदलाव किया गया है। अब ऐसे राज्यों में फॉर्म-6 भरते समय आवेदक को अपने, माता-पिता या दादा-दादी के 2003 की पुरानी मतदाता सूची में नाम होने से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा नहीं करनी होगी। यह बदलाव फॉर्म-6 में SIR से जुड़े अतिरिक्त हिस्से को हटाने के तौर पर सामने आया है।
इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ेगा, जिनका नाम SIR के दौरान मतदाता सूची से बाहर हो गया है और वे दोबारा नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 दाखिल करेंगे। अब उन्हें पुराने रिकॉर्ड में माता-पिता या दादा-दादी का नाम खोजकर उसकी जानकारी देने की अतिरिक्त प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि नाम बिना जांच के मतदाता सूची में शामिल कर दिया जाएगा। पात्रता और फॉर्म-6 की सामान्य प्रक्रिया जारी रहेगी।
पहले SIR प्रक्रिया में पुराने मतदाता रिकॉर्ड यानी 2002-03 के आसपास की पिछली गहन पुनरीक्षण सूची से मिलान को महत्व दिया गया था। निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों में भी SIR के दौरान फॉर्म-6 के साथ निर्धारित घोषणा-पत्र की व्यवस्था का उल्लेख किया गया था।
इस बदलाव से पहली बार मतदाता बनने वाले लोगों के लिए भी प्रक्रिया सरल होगी। उन्हें फॉर्म-6 में पुराने SIR रिकॉर्ड से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी देने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि, पुरानी मतदाता सूचियां SIR के दौरान रिकॉर्ड के सत्यापन और मिलान के लिए इस्तेमाल होने से पूरी तरह बाहर नहीं होती हैं।
फॉर्म-6 में SIR से जुड़ी जानकारी शामिल किए जाने को लेकर पहले चुनाव आयोग के भीतर मतभेद की रिपोर्ट भी सामने आई थी। रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त विवेक जोशी और सुखबीर सिंह संधू ने इस अतिरिक्त हिस्से को लेकर आपत्ति जताई थी। दूसरी ओर, आयोग ने अपने फैसलों को लेकर सार्वजनिक रूप से सर्वसम्मति की बात कही थी।
आयोग के मौजूदा कार्यक्रम के अनुसार 2026 में SIR अलग-अलग चरणों में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में चल रहा है। कई राज्यों में प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, जबकि अन्य राज्यों में सत्यापन, दावे-आपत्तियां और अंतिम मतदाता सूची जारी करने की प्रक्रिया अलग-अलग तारीखों पर निर्धारित है।


