काठमांडू। नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश चोलेन्द्र शमशेर राणा को रविवार सुबह काठमांडू की क्राइम इन्वेस्टिगेशन टीम उनके महाराजगंज स्थित आवास से अपने साथ ले गई। शुरुआती खबरों में इसे गिरफ्तारी बताया गया, लेकिन बाद में पुलिस ने कहा कि उन्हें सुरक्षा संबंधी खतरे के चलते कार्यालय लाया गया है और उनके खिलाफ फिलहाल कोई आपराधिक मुकदमा चलाने की योजना नहीं है।
नेपाल के कांतिपुर के मुताबिक, पुलिस टीम रविवार तड़के करीब 3 बजे राणा के घर पहुंची। पुलिस ने उनसे साथ चलने को कहा और सुरक्षा खतरे का हवाला दिया। रिपोर्ट के अनुसार उन्हें कोई गिरफ्तारी वारंट नहीं दिखाया गया और कुछ घंटों बाद पुलिस ने सार्वजनिक रूप से कार्रवाई को गिरफ्तारी के रूप में बताया।
पुलिस अधिकारी र अमेश्वर कार्की ने बताया कि राणा को सुरक्षित स्थान पर रखा गया है। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि सुरक्षा खतरा किससे या किस कारण से था। अधिकारी के अनुसार उन्हें छोड़ा जाएगा और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की योजना नहीं है।
राणा ने जनवरी 2019 में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश का पद संभाला था। फरवरी 2022 में संसद में उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव दर्ज होने के बाद उन्हें पद से निलंबित कर दिया गया था। महाभियोग की प्रक्रिया लंबे समय तक संसद में लंबित रही।
हाल ही में नेपाल के सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने राणा के खिलाफ लंबित महाभियोग से संबंधित याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए माना कि महाभियोग प्रस्ताव का उद्देश्य समाप्त हो चुका है और संबंधित रिट याचिकाएं खारिज कर दीं।
राणा के कार्यकाल का एक महत्वपूर्ण फैसला तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली की सरकार से जुड़ा था। राणा की अध्यक्षता वाली संवैधानिक पीठ ने ओली सरकार के संसद भंग करने के फैसले को खारिज किया था और शेर बहादुर देउबा को प्रधानमंत्री नियुक्त करने का आदेश दिया था।


