– 142 वाहनों से अब तक 5 करोड़ से अधिक की चपत का खुलासा
– एसटीएफ की जांच तेज
लखनऊ। राजधानी में जाली दस्तावेजों के आधार पर फर्जी फास्टैग तैयार कर टोल प्लाजा से वाहनों को गुजारने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रारंभिक जांच में 142 वाहनों के जरिए पांच करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसटीएफ जांच कर रही है।
बताया गया कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वाहनों के लिए फास्टैग तैयार किए गए और इनका इस्तेमाल टोल भुगतान व्यवस्था में किया गया। इस तरह टोल राजस्व को भारी नुकसान पहुंचने का आरोप है। जांच आगे बढ़ने के साथ वाहनों और लेनदेन की संख्या बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
मामले में आरटीओ की ओर से 3 अप्रैल को सरोजिनी नगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया था। केस दर्ज होने के बाद जांच एसटीएफ को सौंपी गई। जांच के दौरान एसटीएफ ने कार्रवाई करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।
जांच एजेंसी ने मामले की तह तक पहुंचने के लिए इटौंजा टोल प्लाजा पर छापा भी मारा था। कार्रवाई के दौरान टोल प्लाजा से जुड़े महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक और दस्तावेजी साक्ष्य कब्जे में लिए गए।
एसटीएफ ने टोल प्लाजा से डीवीआर, सर्वर और अन्य दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। बताया जा रहा है कि पुराने रिकॉर्ड और डाटा को रिकवर करने के लिए डीवीआर और सर्वर को तकनीकी जांच के लिए लैब भेजा गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि सबूत मिटाने के उद्देश्य से सीसीटीवी फुटेज के साथ छेड़छाड़ किए जाने की आशंका है। ऐसे में जांच एजेंसी डिलीट या क्षतिग्रस्त डाटा को रिकवर करने का प्रयास कर रही है।
अधिकारियों के मुताबिक सर्वर से पुराना डाटा रिकवर होने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि फर्जी फास्टैग के जरिए कुल कितने वाहनों को टोल प्लाजा से गुजारा गया और टोल राजस्व को वास्तविक नुकसान कितना हुआ।
फिलहाल शुरुआती जांच में 142 वाहनों से पांच करोड़ रुपये से अधिक की चपत का मामला सामने आया है। सर्वर और डीवीआर से मिलने वाले डाटा के आधार पर जांच का दायरा और बढ़ सकता है। एसटीएफ फर्जी दस्तावेज तैयार करने, फास्टैग जारी कराने और टोल प्लाजा पर उनके इस्तेमाल से जुड़े पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है।


