मुंबई। भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स 1248 अंक यानी 1.67 प्रतिशत टूटकर 73,581 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 384 अंक यानी 1.64 प्रतिशत गिरकर 23,063 पर आ गया। बैंकिंग, धातु और वाहन कंपनियों के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव रहा। बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों की संपत्ति करीब चार लाख करोड़ रुपये घट गई।
बाजार में गिरावट की बड़ी वजह कच्चे तेल की कीमतों में उछाल रही। ब्रेंट क्रूड करीब 102 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है। ईरान-अमेरिका तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। महंगे कच्चे तेल से भारत के आयात बिल, महंगाई और रुपये पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ती प्रतिफल दर और बीमा क्षेत्र के प्रस्तावित नियमों को लेकर चिंता ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया। अमेरिका की 10 वर्षीय ट्रेजरी पर प्रतिफल बढ़कर 5.11 प्रतिशत पहुंच गया, जो 2007 के बाद का ऊंचा स्तर है। वहीं, बीमा क्षेत्र में प्रस्तावित बदलावों से कंपनियों की कमाई प्रभावित होने की आशंका के चलते वित्तीय और बीमा शेयरों में बिकवाली हुई। पीबी फिनटेक करीब 10 प्रतिशत तक गिरा, जबकि एक्सिस बैंक, बजाज फाइनेंस और बजाज फिनसर्व भी दबाव में रहे।
गुरुवार की गिरावट के बाद बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण करीब 485 लाख करोड़ रुपये से घटकर 481 लाख करोड़ रुपये रह गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को घबराहट में फैसला लेने के बजाय अपने निवेश और जोखिम का आकलन करना चाहिए। इसी बीच ए-वन स्टील्स और मनीव्यू के आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) भी गुरुवार से खुले, जिनमें 28 सितंबर तक बोली लगाई जा सकेगी।


