– सहकारिता विभाग की बैठक में उर्वरक बिक्री को लेकर दिए गए दिशा-निर्देश
– कालाबाजारी पर होगी कार्रवाई
फर्रुखाबाद। जिले में किसानों को समय से और निर्धारित व्यवस्था के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराने को लेकर गुरुवार को विकास भवन सभागार में मुख्य विकास अधिकारी की अध्यक्षता में सहकारिता विभाग के सचिवों एवं प्रभारियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उर्वरक बिक्री एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा के साथ ही समितियों के माध्यम से किसानों तक खाद पहुंचाने के निर्देश दिए गए।
बैठक में क्षेत्र प्रबंधक कृभको, जिला प्रबंधक पीसीएफ, सचिव/मुख्य कार्यपालक अधिकारी जिला सहकारी बैंक लिमिटेड फतेहगढ़, सहायक विकास अधिकारी (सहकारिता), अपर जिला सहकारी अधिकारी, सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता तथा जिला कृषि अधिकारी ने प्रतिभाग किया।
बैठक में सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधक सहकारिता ने निर्देश दिए कि समितियों में स्पष्ट रूप से रेट बोर्ड लगाया जाए। समितियों में सचिव की उपस्थिति का रोस्टर भी प्रदर्शित किया जाए। समितियों की जियो टैगिंग कराने के निर्देश भी दिए गए।
उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के प्रावधानों के अनुसार रूप पत्र पर उर्वरक स्टॉक एवं बिक्री रजिस्टर का रखरखाव सुनिश्चित करने को कहा गया। समितियों पर उर्वरक पहुंचने के बाद तत्काल प्राथमिकता के आधार पर उसका एक्नॉलेजमेंट कराने के निर्देश दिए गए।
बैठक में बताया गया कि वर्तमान में जिले के बफर स्टॉक में 7295.000 मीट्रिक टन यूरिया, 4343.000 मीट्रिक टन एनपीके, 1429.000 मीट्रिक टन डीएपी तथा 356.000 मीट्रिक टन एमओपी उपलब्ध है। अधिकारियों के अनुसार जनपद में उर्वरक पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है।
जिला कृषि अधिकारी ने बताया कि किसानों को फार्मर आईडी के आधार पर उर्वरक का वितरण किया जाएगा। जिन किसानों के पास फार्मर आईडी उपलब्ध नहीं है अथवा फार्मर आईडी पर उनके सम्पूर्ण रकबे का अंकन नहीं है, उन्हें फार्मर आईडी एवं खतौनी के आधार पर संस्तुत मात्रा के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
मुख्य विकास अधिकारी ने निर्देश दिए कि सभी उर्वरक बिक्री केंद्र समय से खोले जाएं और किसानों को मानक के अनुरूप उर्वरक उपलब्ध कराया जाए।
अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि यदि किसी बिक्री केंद्र पर उर्वरक वितरण में अनियमितता या कालाबाजारी की शिकायत सामने आती है तो उर्वरक नियंत्रण आदेश-1985 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
बैठक में यह भी तय किया गया कि समय-समय पर मुख्य विकास अधिकारी द्वारा उर्वरक की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। इसके साथ ही क्षेत्र में टीम गठित कर उर्वरक बिक्री केंद्रों का निरीक्षण भी कराया जाएगा, ताकि किसानों को निर्धारित दर एवं मानक के अनुसार खाद उपलब्ध हो सके।


