लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने यात्रियों और ऑनलाइन डिलिवरी (Online delivery) सेवाओं को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एग्रीगेटर कंपनियों के लिए लाइसेंस व्यवस्था को अनिवार्य कर दिया है। परिवहन विभाग की ओर से जारी नए नोटिस के अनुसार, प्रदेश में दोपहिया, तीन-पहिया, ऑटो और चार-पहिया यात्री वाहनों की एग्रीगेटर सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों को राज्य सरकार से आधिकारिक लाइसेंस लेना होगा। इसके दायरे में Ola-Uber और Rapido जैसी सेवाएं शामिल हैं।
नई व्यवस्था केवल यात्री परिवहन सेवाओं तक सीमित नहीं है। ऑनलाइन डिलिवरी सेवाएं उपलब्ध कराने वाली ई-कॉमर्स कंपनियों को भी लाइसेंस लेना होगा। स्विगी, जोमैटो और अमेजन जैसी कंपनियां इस व्यवस्था के दायरे में आएंगी। सरकार का उद्देश्य इन सेवाओं को नियमों के तहत लाकर जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
परिवहन विभाग के मुताबिक संबंधित कंपनियों को राज्य परिवहन प्राधिकरण के विशेष ऑनलाइन पोर्टल upmyfleet.com के माध्यम से लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा। लाइसेंस और पंजीकरण प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही निर्धारित सेवाओं का संचालन किया जा सकेगा।
सरकार के इस कदम का उद्देश्य ऐप आधारित टैक्सी, बाइक राइड और अन्य परिवहन सेवाओं का इस्तेमाल करने वाले लोगों की सुरक्षा बढ़ाना है। लाइसेंस व्यवस्था से कंपनियों की जवाबदेही तय करने और सेवा से जुड़ी शिकायतों के निपटारे में मदद मिलने की उम्मीद है। एग्रीगेटर के लिए केंद्रीय स्तर पर जारी 2025 दिशानिर्देशों में भी सुरक्षा, प्रशिक्षण और बीमा जैसी शर्तें निर्धारित की गई हैं।
परिवहन विभाग ने स्पष्ट किया है कि बिना जरूरी लाइसेंस के सेवाएं संचालित करने वाली कंपनियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। नई व्यवस्था से ऑनलाइन कैब, बाइक राइड और डिलिवरी सेवाओं के संचालन में नियमन बढ़ने के साथ कंपनियों की जिम्मेदारी भी तय होगी।


