– तीन स्टोरों से आठ नमूने लेकर विभाग ने निभाई औपचारिकता
– बड़े कारोबारियों पर कार्रवाई न करने की न्योछावर
फर्रुखाबाद। मेडिकल स्टोरों पर औषधि विभाग की औचक जांच अब मज़ाक मानी जा रही ।जिला औषधि निरिक्षक की भ्रष्ट कार्यशैली के बीच खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने कुछ छोटे निजी अस्पतालों और नर्सिंगहोम में संचालित तीन मेडिकल स्टोरों की जांच कर आठ दवाओं के नमूने लिए और लाइसेंस की शर्तों के उल्लंघन का हवाला देते हुए तीन संचालकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस की संस्तुति की।
कार्रवाई के अनुसार आवास विकास तिराहा स्थित माया हॉस्पिटल के निदानिका मेडिकल स्टोर से चार, बढ़पुर स्थित फर्रुखाबाद सिटी हॉस्पिटल के सियोवोल इंटरप्राइजेज से दो तथा आवास विकास कॉलोनी स्थित आरके हॉस्पिटल के मेडिकल स्टोर से दो दवाओं के नमूने लिए गए। टीम ने क्रय-विक्रय संबंधी अभिलेख भी जांचे।
औषधि विभाग की इस कार्रवाई के बाद लोगों का मानना है कि क्या जांच का दायरा केवल चुनिंदा मेडिकल स्टोरों तक सीमित रहेगा या जिले के बड़े दवा कारोबारियों और बड़े थोक विक्रेताओं के यहां भी इसी तरह की निष्पक्ष जांच होगी?
यदि विभाग को मेडिकल स्टोरों में नियमों के उल्लंघन की शिकायतें मिल रही हैं तो फिर जांच की पारदर्शिता, चयन की प्रक्रिया और कार्रवाई के समान मानक सार्वजनिक किए जाने चाहिए। छोटे कारोबारियों पर कार्रवाई और बड़े कारोबारियों को लेकर कथित नरमी की चर्चाओं को समाप्त करने के लिए विभाग को अपनी कार्रवाई का रिकॉर्ड स्पष्ट करना होगा।
औषधि निरीक्षक स्वागतिका घोष के अनुसार सभी नमूनों को राजकीय जन विश्लेषक प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। प्रयोगशाला रिपोर्ट आने के बाद दवाओं की गुणवत्ता और नियमों के उल्लंघन के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
लोग मज़ाक बना रहे हैं कि सिर्फ नमूने लेना ही कार्रवाई है या रिपोर्ट आने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर वास्तव में कठोर कार्रवाई भी होगी।
मेडिकल स्टोरों की जांच को लेकर आम जनमानस मे चर्चा है विभाग के उच्चाधिकारियों से लोगों की मांग है कि जिले में मेडिकल स्टोरों की जांच का स्थानवार विवरण, लिए गए नमूनों की संख्या, मिली अनियमितताएं और की गई कार्रवाई सार्वजनिक की जाए। इससे यह स्पष्ट हो सकेगा कि अभियान वास्तव में व्यापक है या केवल कागजी खानापूर्ति।


