लखनऊ। उत्तर प्रदेश में मानसून अब कमजोर पड़ने लगा है और प्रदेश से इसकी विदाई की शुरुआत के बीच मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। कई जिलों में बारिश सामान्य से काफी कम दर्ज की गई है। देवरिया में सामान्य से 75 प्रतिशत, कुशीनगर में 69 प्रतिशत, कानपुर देहात में 63 प्रतिशत और भदोही में 60 प्रतिशत कम बारिश हुई है। हालांकि पहाड़ी क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के चलते प्रदेश की कई नदियां अब भी उफान पर हैं और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है।
लखीमपुर-खीरी में खेत में मवेशियों के लिए चारा लेने गए युवक पर करीब 10 फीट लंबे अजगर ने हमला कर दिया। घास में छिपे अजगर ने पहले युवक का हाथ जकड़ा और फिर उसके गले में लिपट गया। युवक के शोर मचाने पर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। करीब 10 से 15 मिनट की मशक्कत के बाद अजगर को युवक से अलग किया जा सका। घटना में युवक के बाएं हाथ में चोट आई है।
उधर, उन्नाव में गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद कई रिहायशी इलाकों और संपर्क मार्गों पर पानी भरा हुआ है। कुछ स्थानों पर गलियों में नावों के सहारे लोगों की आवाजाही जारी है। ललितपुर में बेतवा नदी का पानी कई छोटे पुलों के ऊपर से बह रहा है, इसके बावजूद लोग तेज बहाव के बीच वाहन लेकर पुल पार करते नजर आ रहे हैं। सीतापुर के रामपुर मथुरा और महमूदाबाद क्षेत्र में भी कई सड़कें और संपर्क मार्ग जलमग्न हैं, जिससे ग्रामीणों और स्कूली बच्चों की परेशानी बढ़ गई है।
बाराबंकी के कुर्सी थाना क्षेत्र के बैना गांव में बारिश के पानी से भरे गड्ढे में नहाने के दौरान तीन बच्चों की डूबने से मौत हो गई। ग्रामीणों ने दो बच्चों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया, जबकि तीसरे बच्चे का शव बाद में बरामद किया गया। ललितपुर में खेत में काम कर रहे एक किसान की आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गई।
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार को प्रदेश में बारिश का कोई अलर्ट नहीं है। सुबह कई जिलों में तेज धूप खिली रही, जबकि बीच-बीच में बादल भी छाए। स्थानीय स्तर पर कहीं-कहीं हल्की बूंदाबांदी हो सकती है। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए मौसम तंत्र के प्रभाव से 23 सितंबर से पूर्वी उत्तर प्रदेश और 24 सितंबर से पश्चिमी उत्तर प्रदेश में दोबारा बारिश का दौर शुरू हो सकता है।
मौसम में बदलाव का असर रबी की फसलों पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। विशेषज्ञों के मुताबिक सितंबर के अंतिम दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो खेतों में नमी की कमी से गेहूं, चना और सरसों की समय पर बुआई प्रभावित हो सकती है। वहीं आगामी सर्दियों में तापमान सामान्य से अधिक रहने पर शीतलहर के दिनों में कमी आने की संभावना भी जताई गई है।


