लखनऊ। उत्तर प्रदेश में गोवंश के स्वास्थ्य, उपचार और संरक्षण को लेकर सरकार ने व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। बीमार और घायल गोवंश को उपचार के लिए इंतजार न करना पड़े, इसके लिए हर जिले में आपातकालीन बचाव तंत्र तैयार किया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत जरूरतमंद गोवंश को समय पर बचाव, उपचार और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा।
गोवंश के लिए चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने के साथ ही पंचगव्य चिकित्सा से जुड़े शोध को भी बढ़ावा देने की तैयारी है। मथुरा स्थित पशु चिकित्सा विश्वविद्यालय में पंचगव्य चिकित्सा संबंधी शोध को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके अलावा लखनऊ के राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय में भी शोध कार्यों को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा।
सरकार ने गो-आधारित उत्पादों के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। स्वयं सहायता समूहों को गो-आधारित उत्पादों से जोड़ने के साथ किसान उत्पादक संगठनों, किसानों और गोपालकों को प्रोत्साहित किया जाएगा। इसके जरिए ग्रामीण स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर रहेगा।
गोवंश को संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिए समयबद्ध टीकाकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। लम्पी बीमारी की रोकथाम के लिए निर्धारित समय पर टीकाकरण कराने तथा खुरपका-मुंहपका बीमारी से बचाव के लिए भी त्वरित टीकाकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरकार का जोर बचाव से लेकर उपचार और टीकाकरण तक पूरी व्यवस्था को मजबूत करने पर है। जिलों में आपातकालीन बचाव तंत्र बनने से बीमार अथवा घायल गोवंश को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था को गति मिलने की उम्मीद है। साथ ही शोध और गो-आधारित ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर पशुपालन से जुड़े लोगों की आय के नए अवसर विकसित करने पर भी जोर रहेगा।


