गोपालगंज: असम (Assam) में कार्यरत एक युवा सिविल इंजीनियर (Civil engineer) की संदेहास्पद परिस्थितियों में मौत हो गई है। मृतक का शव एक चीनी मिल के पास स्थित तालाब (Pond) से बरामद हुआ है। इस घटना से मृतक के पैतृक गांव में मातम छा गया है और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए असम सरकार से मामले की उच्चस्तरीय और न्यायिक जांच की मांग की है।
मृतक की पहचान गोपालगंज जिले के उचकागांव थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले दहीभत्ता गांव निवासी रामप्रीत ठाकुर के 30 वर्षीय पुत्र दीपक ठाकुर के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, दीपक असम के नगांव जिले स्थित कामपुर चीनी मिल में बतौर सिविल इंजीनियर अपनी सेवाएं दे रहे थे। अपनी मेहनत और लगन से वे परिवार का सहारा बने हुए थे, लेकिन अचानक हुई इस अनहोनी ने सबको झकझोर कर रख दिया है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इंजीनियर दीपक ठाकुर गत 16 सितंबर को अचानक अपनी कंपनी और कमरे से लापता हो गए थे। काफी तलाश करने के बावजूद उनका कोई सुराग नहीं मिल पाया। खोजबीन के अगले दिन कंपनी के ठीक पास स्थित एक तालाब से उनका शव संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। परिजनों का आरोप है कि हत्यारों ने पहले दीपक की गर्दन पर चाकू से वार कर निर्मम हत्या की और उसके बाद सबूत मिटाने के लिए शव को तालाब में फेंक दिया।
इस सनसनीखेज वारदात के बाद परिजनों ने कंपनी के मैनेजर और कुछ सहकर्मियों पर गंभीर संदेह जताया है। मृतक के भाई गुलाब ठाकुर ने मांग की है कि असम सरकार इस मामले को प्राथमिकता देते हुए एक निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बिठाए, ताकि इस जघन्य अपराध के असली दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। स्थानीय प्रशासन का कहना है कि पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर गहराई से तफ्तीश कर रही है।
घटना की जानकारी मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। गोपालगंज के सांसद प्रतिनिधि रामाशीष सिंह ने शोक संतप्त परिवार से मिलकर ढांढस बंधाया। उन्होंने बिहार सरकार से पीड़ित परिवार को अविलंब उचित आर्थिक मुआवजा देने की अपील की है। साथ ही, बिहार सरकार से यह भी आग्रह किया गया है कि वह असम सरकार व पुलिस से समन्वय स्थापित कर न्याय सुनिश्चित करे। फिलहाल, सभी आवश्यक कागजी औपचारिकताएं पूरी कर दीपक ठाकुर के पार्थिव शरीर को असम से उनके पैतृक गांव लाने की तैयारी चल रही है।


