आरोप निराधार हैं तो जांच से क्यों घबराहट
शासन की जांच खोलेगी भ्रष्टाचार के दावों की परतें
कन्नौज। समधन नगर पंचायत में अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता और अध्यक्ष पुत्र अयान सिद्दीकी को लेकर लगाए जा रहे भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुक्रवार को दिव्या गुप्ता और अयान की नजदीकियों तथा भ्रष्टाचार के आरोपों को निराधार बताया गया, लेकिन शिकायतकर्ताओं का कहना है कि असली तस्वीर किसी बयान या सफाई से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच से सामने आएगी। अब निगाहें शासन और जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं।
शिकायतों में नगर पंचायत के निर्माण कार्यों, खरीद, ठेकों, भुगतान और बैंक लेनदेन को लेकर सवाल उठाए गए हैं। मांग है कि छह जनवरी से अब तक के सभी विकास कार्यों की फाइलें, निविदा प्रक्रिया, कार्यादेश, माप पुस्तिकाएं, भुगतान अभिलेख, बाजार मूल कोटेशन और बैंक खातों की जांच कराई जाए। यदि प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी रही है तो दस्तावेजों की जांच से आरोप स्वत: साफ हो सकते हैं, लेकिन यदि कहीं नियमों को दरकिनार कर सरकारी धन का इस्तेमाल हुआ है तो जांच उसकी जिम्मेदारी भी तय कर सकती है।
चंद दिनों में खड़ा हुआ संपत्ति का साम्राज्य,अब आय और संपत्ति का होगा मिलान
ईओ दिव्या गुप्ता की संपत्तियों और खर्चीली जीवनशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। आरोप है कि कम समय में संपत्ति और निजी खर्च के स्तर में हुई वृद्धि की जांच जरूरी है। इन्होंने अब तक कई प्लॉट पारिवारिक जनों के नाम खरीदे हैं, और तो और कंप्यूटर ऑपरेटर से अपने सगे भाई के खाते में पैसे भी भिजवाए हैं ,ऐसे में उनकी घोषित आय, सेवा संबंधी आय, बैंक खातों और ज्ञात संपत्तियों का मिलान महत्वपूर्ण होगा।
तीन स्तर की जांच से साफ हो सकती है तस्वीर
मामले में पहली जांच विभागीय एवं प्रशासनिक जांच के तौर पर कराई जा सकती है, जिसमें नगर पंचायत की फाइलों, ठेकों, भुगतान और निर्माण कार्यों की जांच हो। दूसरी ओर स्थानीय निकाय के वित्तीय अभिलेखों का विशेष लेखा परीक्षण कराकर भुगतान और सरकारी धन के इस्तेमाल की पड़ताल की जा सकती है। संपत्ति और आय से जुड़े आरोपों की स्थिति में सक्षम जांच एजेंसी द्वारा आय से अधिक संपत्ति अथवा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच भी तथ्यों के आधार पर कराई जा सकती है।
अयान सिद्दीकी के साथ ईओ की कथित नजदीकियों को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। हालांकि किसी व्यक्तिगत संबंध को अपने आप भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं माना जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या नगर पंचायत के फैसलों, ठेकों, भुगतान अथवा प्रशासनिक कार्यों में किसी व्यक्ति को नियमों से परे प्रभाव मिला। इसका जवाब भी दस्तावेजी जांच से ही सामने आएगा।
फिलहाल आरोपों और सफाई के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि समधन नगर पंचायत में आखिर कितना भ्रष्टाचार हुआ और सरकारी धन का इस्तेमाल नियमों के मुताबिक हुआ या नहीं। यदि शिकायतें बेबुनियाद हैं तो निष्पक्ष जांच से दिव्या गुप्ता और अयान सिद्दीकी दोनों की स्थिति साफ हो सकती है। वहीं यदि अभिलेखों में गड़बड़ी मिलती है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई का रास्ता खुलेगा। अब मामला बयानबाजी से आगे बढ़कर फाइलों, बैंक खातों, संपत्ति के ब्योरे और जमीन पर हुए विकास कार्यों की जांच तक पहुंचना जरूरी है।


