नेपाल के लिए भारत खोलेगा खजाना
निभाएगा पड़ोसी से दोस्ती,
नई दिल्ली/काठमांडू। नेपाल में अगस्त में आई भीषण बाढ़ से तबाह हुए बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए नेपाल ने भारत से मदद मांगी है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने नई दिल्ली में भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए सहयोग और अनुदान का अनुरोध किया। सीतारमण ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए भरोसा दिलाया कि आपदा के बाद जरूरतों का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद भारत सहायता को लेकर निर्णय करेगा।
नेपाल के भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने सड़क, पुल, ऊर्जा परियोजनाओं और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है। नेपाल सरकार के प्रारंभिक आकलन में पुनर्निर्माण और बहाली के लिए करीब 723.31 अरब नेपाली रुपये की जरूरत बताई गई है, जिसमें लगभग तीन-चौथाई हिस्सा बुनियादी ढांचे के नुकसान से जुड़ा है।
बैठक में नेपाल के वित्त मंत्री ने राहत और बचाव अभियान के दौरान भारत की ओर से उपलब्ध कराई गई राहत सामग्री और तकनीकी सहायता के लिए आभार जताया। भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, सीतारमण ने बाढ़ में जान गंवाने वालों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए नेपाल के पुनर्बहाली और पुनर्निर्माण में लगातार सहयोग का भरोसा दिया। दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और संपर्क व्यवस्था मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
नेपाल ने पुनर्निर्माण के लिए किसी निश्चित रकम की मांग नहीं रखी है। वागले ने कहा है कि फिलहाल नेपाल आपदा के बाद जरूरतों का आकलन कर रहा है और भारत से 2015 के भूकंप के बाद मिली सहायता जैसी उदार मदद की उम्मीद है। उस समय भारत ने नेपाल के पुनर्निर्माण के लिए एक अरब डॉलर की सहायता का वादा किया था, जिसमें अनुदान और रियायती ऋण दोनों शामिल थे।
भोटेकोशी बाढ़ का असर केवल बुनियादी ढांचे तक सीमित नहीं है। सरकारी आकलन के अनुसार तीन जिलों के 63 शिक्षण संस्थानों में 14,500 से अधिक बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। कई स्कूलों का इस्तेमाल राहत शिविरों के रूप में भी किया जा रहा है। ऐसे में नेपाल के सामने राहत के साथ-साथ बड़े पैमाने पर पुनर्निर्माण की चुनौती खड़ी है।
नेपाल के वित्त मंत्री का भारत दौरा दोनों देशों के बीच आर्थिक और विकास सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। वागले ने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से भी मुलाकात का कार्यक्रम रखा है। दोनों देशों के बीच संपर्क, व्यापार, ऊर्जा, निवेश और बाढ़ के बाद पुनर्निर्माण को लेकर आगे की रणनीति पर बातचीत जारी रहने की संभावना है।


