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Wednesday, September 16, 2026

2027 से पहले यूपी की सियासत में वोटों के रुझान की जंग

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2024 के आंकड़ों से दलों ने कसी कमर

प्रशांत कटियार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दल 2024 के लोकसभा चुनाव में बदले मतदाताओं के रुझान को समझने और अपने-अपने सामाजिक एवं राजनीतिक समीकरण मजबूत करने में जुट गए हैं। लोकसभा चुनाव के नतीजों ने प्रदेश की राजनीति में कई पुराने समीकरणों को चुनौती दी। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव अलग-अलग मुद्दों, परिस्थितियों और मतदान व्यवहार के आधार पर होते हैं, इसलिए 2024 के आंकड़ों को 2027 का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा।

2024 में सपा सबसे अधिक सीटों के साथ आगे निकली

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर 2024 में समाजवादी पार्टी ने 37 सीटें जीतकर सबसे अधिक सीटें हासिल कीं। भाजपा को 33, कांग्रेस को छह, राष्ट्रीय लोकदल को दो और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) तथा अपना दल (सोनेलाल) को एक-एक सीट मिली। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक परिणामों में इन दलों के प्रदर्शन का विस्तृत रिकॉर्ड दर्ज है।

विधानसभा क्षेत्रों के आंकड़ों ने भी बदली तस्वीर

2024 के लोकसभा चुनाव को प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों के स्तर पर देखा जाए तो उपलब्ध विधानसभा-खंडवार विश्लेषण में सपा 184 विधानसभा क्षेत्रों में सबसे आगे रही, जबकि कांग्रेस 39 क्षेत्रों में आगे रही। दूसरी ओर भाजपा 162, राष्ट्रीय लोकदल आठ और अपना दल (सोनेलाल) चार विधानसभा क्षेत्रों में बढ़त बनाने में सफल रहे। इस तरह विपक्षी गठबंधन के घटकों की संयुक्त बढ़त 224 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंची, जबकि एनडीए के घटकों की बढ़त 174 क्षेत्रों में रही। शेष विधानसभा क्षेत्रों में अन्य दल आगे रहे।

वोट प्रतिशत और सीटों के बीच अंतर अहम

लोकसभा चुनाव में मिले कुल मत प्रतिशत और जीती गई सीटों का अनुपात हमेशा एक जैसा नहीं होता। किसी दल को कई क्षेत्रों में कम अंतर से बढ़त मिलने पर उसकी सीट संख्या बढ़ सकती है, जबकि अधिक वोट प्रतिशत के बावजूद दूसरे दल को अपेक्षाकृत कम सीटें मिल सकती हैं। यही वजह है कि 2027 के लिए राजनीतिक दल केवल कुल वोट प्रतिशत ही नहीं, बल्कि विधानसभा क्षेत्रवार प्रदर्शन, बूथ स्तर की स्थिति और अलग-अलग सामाजिक समूहों के मतदान रुझान पर भी नजर रख रहे हैं।

2022 का विधानसभा चुनाव अलग तस्वीर दिखाता है

2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 255 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी, जबकि समाजवादी पार्टी को 111 सीटें मिली थीं। निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड में 2022 के विधानसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश के सभी 403 निर्वाचन क्षेत्रों और दलों के परिणाम दर्ज हैं।

इससे यह भी स्पष्ट होता है कि लोकसभा चुनाव के विधानसभा-खंडवार आंकड़ों और वास्तविक विधानसभा चुनाव के परिणामों में बड़ा अंतर हो सकता है। 2024 में जिन विधानसभा क्षेत्रों में किसी दल को लोकसभा चुनाव के दौरान बढ़त मिली, वहां विधानसभा चुनाव में वही स्थिति कायम रहेगी, यह पहले से तय नहीं है।

2007 और 2012 में भी बदले थे चुनावी समीकरण

उत्तर प्रदेश की राजनीति में लोकसभा और विधानसभा चुनाव के बीच मतदाताओं के रुख में बदलाव पहले भी दिखाई देता रहा है। 2004 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को प्रदेश में सबसे अधिक लोकसभा सीटें मिली थीं, जबकि 2007 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने बहुमत हासिल कर सरकार बनाई। इसी तरह 2009 के लोकसभा चुनाव के बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई। इससे प्रदेश में चुनाव-दर-चुनाव मतदाताओं के मुद्दों और प्राथमिकताओं में बदलाव की भूमिका सामने आती है।

2027 के लिए संगठन और सामाजिक समीकरण पर जोर

2027 की तैयारी में राजनीतिक दल बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने, नए मतदाताओं तक पहुंच बनाने और विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने पर जोर दे रहे हैं। कांग्रेस ने भी उत्तर प्रदेश में संगठन की सक्रियता की समीक्षा के लिए जिला, मंडल और ब्लॉक स्तर पर पदाधिकारियों के कामकाज की समीक्षा की प्रक्रिया शुरू की है। दूसरी ओर अन्य दल भी 2024 के चुनावी प्रदर्शन के आधार पर अपनी रणनीति और संगठनात्मक तैयारियों को नए सिरे से देख रहे हैं।

सिर्फ 2024 के आंकड़ों से तय नहीं होगा 2027 का परिणाम

2024 के लोकसभा चुनाव में सामने आए आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण जरूर हैं, लेकिन 2027 के विधानसभा चुनाव का परिणाम इन आंकड़ों से निर्धारित नहीं किया जा सकता। विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे, प्रत्याशी, जातीय-सामाजिक समीकरण, सरकार के कामकाज को लेकर मतदाताओं की धारणा, गठबंधन और मतदान प्रतिशत जैसे कई कारक भूमिका निभाएंगे। इसलिए फिलहाल 2024 के आंकड़े राजनीतिक दलों के लिए रणनीति तैयार करने का आधार हैं, अंतिम चुनावी परिणाम का अनुमान नहीं।

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