रामपुर। जौहर ट्रस्ट से जुड़े वित्तीय मामलों में आयकर विभाग ने कार्रवाई का अगला चरण शुरू कर दिया है। ट्रस्ट का पंजीकरण और कर छूट रद्द किए जाने के बाद विभाग अब करीब 450 करोड़ रुपये की कथित अघोषित आय पर कर, जुर्माना और ब्याज की वसूली की तैयारी कर रहा है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कुल वसूली 500 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है। आगे की कार्रवाई के लिए विभाग ने मुख्यालय से अनुमति मांगी है।
आयकर विभाग की जांच में ट्रस्ट के वित्तीय लेनदेन, दान और जौहर विश्वविद्यालय परिसर में हुए निर्माण कार्यों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। विभाग के अनुसार, कुछ दानदाताओं की वास्तविकता और उनसे प्राप्त रकम को लेकर भी जांच की गई है। 11 संदिग्ध फर्मों से मिले कथित दान के संबंध में विभाग ने पते, रसीद, बहीखाते और बैंक विवरण समेत दस्तावेज मांगे थे।
जौहर विश्वविद्यालय परिसर में बने 59 भवनों की निर्माण लागत को लेकर भी आयकर जांच में बड़ा अंतर सामने आया। संयुक्त आकलन में इन भवनों की लागत करीब 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई, जबकि ट्रस्ट की ओर से पूछताछ के दौरान निर्माण लागत इससे काफी कम बताई गई थी। आयकर विभाग ने इस राशि के स्रोत और बैंक लेनदेन का ब्योरा भी मांगा है।
जांच रिपोर्टों में विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण में सरकारी परियोजनाओं की धनराशि के कथित इस्तेमाल का भी उल्लेख है। हालांकि इन आरोपों पर अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और कार्यवाही के बाद ही स्पष्ट होगा। अगस्त 2026 में प्रवर्तन निदेशालय ने जौहर ट्रस्ट और जौहर विश्वविद्यालय से जुड़े कई परिसरों पर धनशोधन जांच के सिलसिले में तलाशी भी ली थी।
आयकर विभाग की ओर से कथित अघोषित आय पर कर के साथ 30 प्रतिशत जुर्माना और ब्याज वसूलने की तैयारी की बात सामने आई है। अनुमति मिलने के बाद विभाग आगे की कर निर्धारण और वसूली प्रक्रिया शुरू कर सकता है।


