नई दिल्ली। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान आयोजित रात्रिभोज के मेन्यू को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत में मांसाहारी भोजन खाने वालों की बड़ी संख्या का हवाला देते हुए ब्रिक्स मेहमानों के लिए परोसे गए केवल शाकाहारी व्यंजनों पर सवाल उठाया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर लिखा कि भारत का नॉनवेज खाना बेहद स्वादिष्ट है। इसके साथ उन्होंने छोले-भटूरे की तस्वीर भी साझा की।
राहुल के बयान पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस पार्टी अब ब्रिक्स देशों के नेताओं को परोसे गए खाने के मेन्यू पर भी राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि विदेशी मेहमानों ने भारतीय शाकाहारी भोजन का आनंद लिया, जिसमें स्वाद और पोषण के साथ देश के अलग-अलग क्षेत्रों की खानपान परंपराओं की झलक थी।
12 सितंबर की रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल विदेशी मेहमानों के लिए रात्रिभोज की मेजबानी की थी। मेन्यू में पनीर के साथ सूखी सब्जी, चुकंदर का रायता, गुजराती खांडवी, मिलेट्स का पुलाव और कश्मीर की मशरूम से तैयार विशेष व्यंजन शामिल थे। मिठाई में फ्रूट क्रीम के साथ जलेबी परोसी गई। विदेशी मेहमानों के लिए जयपुर में विशेष रूप से तैयार टेबलवेयर भी इस्तेमाल किया गया, जिस पर चांदी की परत चढ़ाई गई थी।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भाजपा पर खान-पान की पसंद थोपने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और यहां मांसाहारी व्यंजनों की भी समृद्ध परंपरा है। एआईएमआईएम नेता वारिस पठान ने भी कहा कि शाकाहारी भोजन को बढ़ावा देने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन भारत की विविध फूड कल्चर को सीमित नहीं किया जाना चाहिए।
राहुल गांधी द्वारा भारत में 80 फीसदी लोगों के मांसाहारी होने के दावे के लिए कोई स्रोत नहीं दिया गया। हालांकि, राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 के अनुसार 15 से 49 वर्ष की उम्र के 83.4 फीसदी पुरुष और 70.6 फीसदी महिलाएं कम से कम कभी-कभार मछली, चिकन या मांस का सेवन करती थीं। वहीं, ब्रिक्स जैसे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में डिनर डिप्लोमेसी को महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि अनौपचारिक माहौल में नेताओं के बीच बातचीत और आपसी विश्वास बढ़ाने का अवसर मिलता है।


