वाल्मीकि समाज को साधने की तैयारी
लखनऊ। आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद से विवाद के बाद रोहिणी घावरी के सक्रिय राजनीति में उतरने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। स्विट्जरलैंड में पढ़ाई और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ी रहीं रोहिणी 11 सितंबर को भारत लौटीं और इसके बाद वाल्मीकि समाज के बीच सक्रियता बढ़ा दी। उन्होंने साफ संकेत दिए हैं कि वह अपने समाज को राजनीतिक रूप से एकजुट करने के अभियान पर काम करेंगी। उनकी सक्रियता का पहला बड़ा पड़ाव उत्तर प्रदेश माना जा रहा है, जहां 2027 के विधानसभा चुनाव के दौरान उनकी भूमिका पर नजर रहेगी।
रोहिणी का कहना है कि उनका लक्ष्य अगले पांच वर्षों में देश के किसी राज्य में वाल्मीकि समाज के व्यक्ति को मुख्यमंत्री बनते देखना है। उनका तर्क है कि जिस समाज को लंबे समय तक केवल सफाई कार्यों तक सीमित नजरिए से देखा गया, उसे सत्ता और राजनीतिक नेतृत्व में भी बराबर हिस्सेदारी मिलनी चाहिए। इसी उद्देश्य से वह उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश में समाज के लोगों के साथ बैठकें कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश में रोहिणी का विशेष फोकस पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उन विधानसभा क्षेत्रों पर रहने की बात सामने आई है, जहां वाल्मीकि समाज चुनावी समीकरणों में प्रभावी भूमिका रखता है। वह दलित समाज में राजनीतिक हिस्सेदारी, सामाजिक न्याय और वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठाने की तैयारी में हैं। उनके अभियान को चंद्रशेखर के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी सक्रियता से जोड़कर देखा जा रहा है।
रोहिणी ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से सहयोग मिलने की बात कही है। उनका कहना है कि चंद्रशेखर के साथ विवाद के दौरान अखिलेश ने उनकी बात सुनी और सहयोग का भरोसा दिया। लखनऊ प्रवास के दौरान उनकी अखिलेश यादव से मुलाकात प्रस्तावित बताई जा रही है। ऐसे में उनके समाजवादी पार्टी के साथ राजनीतिक रूप से आगे बढ़ने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं, हालांकि रोहिणी ने अभी किसी दल में शामिल होने की स्पष्ट घोषणा नहीं की है।
चंद्रशेखर से विवाद को लेकर रोहिणी गंभीर आरोप लगा चुकी हैं। उनका दावा है कि चंद्रशेखर ने शादी का भरोसा देकर उनके साथ धोखा किया और उनका मानसिक व शारीरिक शोषण किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्होंने चंद्रशेखर को राजनीतिक रूप से स्थापित करने में आर्थिक मदद की थी। रोहिणी का कहना है कि उन्होंने इस मामले में महिला आयोग और पुलिस से शिकायत की, लेकिन उनकी शिकायत पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और चंद्रशेखर का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
भारत लौटने के बाद रोहिणी ने भगवान वाल्मीकि आश्रम पहुंचकर आशीर्वाद लिया। इसके बाद दिल्ली और गुरुग्राम में वाल्मीकि समाज के लोगों से संवाद किया। 13 सितंबर को मेरठ और इसके बाद लखनऊ में बैठकों का कार्यक्रम बताया गया है। रोहिणी अब वाल्मीकि समाज के साथ सर्वसमाज को जोड़ने और सामाजिक न्याय के मुद्दों को राजनीतिक अभियान का आधार बनाने की कोशिश में हैं। उनकी बढ़ती सक्रियता को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की दलित राजनीति में एक नए समीकरण की संभावित शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।


