30 C
Lucknow
Sunday, September 13, 2026

भगवान गणेश: प्रथम पूज्य ही नहीं, आदर्श पथ-प्रदर्शक भी

Must read

 

(डॉ. राघवेंद्र शर्मा-विनायक फीचर्स)

गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर जब संपूर्ण सृष्टि विघ्नहर्ता, प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश के स्वागत में लीन होती है, तब केवल उत्सव मनाना पर्याप्त नहीं है। सच्चा उत्सव तब सार्थक होता है जब हम भगवान गणेश की दिव्य कार्यशैली, उनके स्वरूप और आचरण के पीछे छिपे जीवन-दर्शन को अपने भीतर उतारें। आज के घोर कलियुग में, जहाँ मानवीय संवेदनाएं क्षीण हो रही हैं और भौतिकता का बोलबाला है, भगवान गणेश का प्रत्येक कार्य हमें जीने की श्रेष्ठ राह दिखाता है।
भगवान श्री गणेश की सबसे पहली सीख माता-पिता के प्रति अनन्य भक्ति है। पौराणिक कथा के अनुसार जब ब्रह्मांड की परिक्रमा की प्रतियोगिता छिड़ी, तब सभी देवता अपने तीव्रगामी वाहनों पर निकल पड़े। कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार होकर पूरे ब्रह्मांड की परिक्रमा करने चले गए। किंतु गणेश जी के लिए जीत-हार की कोई चिंता नहीं थी। वे जानते थे कि संपूर्ण सृष्टि का सबसे बड़ा सत्य, सबसे बड़ा तीर्थ और सबसे बड़ा आश्रय उनके माता-पिता ही हैं। उन्होंने अत्यंत सहजता और भक्ति भाव से भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा की और उन्हें ही सर्वस्व माना। परिणामस्वरूप वे न केवल विजयी हुए, बल्कि उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान भी प्राप्त हुआ।
आज जब युवा पीढ़ी माता-पिता की अवहेलना करने लगी है, उन्हें अकेला छोड़ देती है या वृद्धाश्रम के हवाले कर देती है, तब श्री गणेश का यह चरित्र पूरी मानवता के लिए महान मार्गदर्शक बन जाता है। यह प्रसंग सिखाता है कि माता-पिता का सम्मान ही संसार का सबसे उत्कृष्ट पुण्य कार्य है।
भगवान गणेश का स्वरूप मात्र धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि सूक्ष्म आध्यात्मिक और व्यावहारिक जीवन-सूत्रों का अद्भुत समावेश है। उनका विशाल उदर हमें बातें पचाने की कला सिखाता है। बड़े पेट का तात्पर्य है कि हमें दूसरों की बुराइयां, अत्यधिक प्रशंसा, आलोचना और गोपनीय बातों को अपने भीतर समाहित रखने का धैर्य होना चाहिए। एक की बात दूसरे से कहकर कलह उत्पन्न न करना ही चरित्र की श्रेष्ठता है।
उनके विशाल कर्ण यानी बड़े कान हमें कुशल श्रोता बनना सिखाते हैं। जीवन में सफलता के लिए दूसरों को सहृदयता से सुनना और समझना आवश्यक है। बोलने से अधिक सुनने का अभ्यास ही व्यक्ति को ज्ञानी बनाता है। ये बड़े कान हमें सजग रहने का भी संकेत देते हैं।
गणेश जी की छोटी आंखें अति सूक्ष्म दृष्टि का संकेत देती हैं। यह सिखाती हैं कि किसी भी छोटी वस्तु या व्यक्ति को तुच्छ नहीं समझना चाहिए और न ही नजरअंदाज करना चाहिए। अक्सर लोग बाहरी चमक-दमक देखकर आकलन कर लेते हैं, जो अनुचित है। छोटी आंखें यह भी संदेश देती हैं कि यदि ईश्वर ने हमें विशाल व्यक्तित्व, उच्च पद या अपार क्षमताएं दी हैं तो उस पर इतराना नहीं चाहिए। अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है।
भगवान गणेश की लंबी सूंड निरंतर सतर्कता और संवेदनशीलता का प्रतीक है। जिस प्रकार सूंड दूर से ही खतरे या गंध का आभास कर लेती है, उसी प्रकार हमारे भीतर भी ऐसी बौद्धिक क्षमता विकसित होनी चाहिए कि यदि हमारे परिवेश में कोई अदृश्य खतरा हो तो उसकी सूचना हमें शीघ्र मिल जाए।
हाथी के मुख से जुड़ी एक और सुंदर सीख है। कहा जाता है कि हाथी के खाने के दांत और होते हैं और दिखाने के और। गणेश जी का स्वरूप समझाता है कि हमें भले ही बाहरी तौर पर कितनी भी प्रतिष्ठा या उपलब्धियां क्यों न मिली हों, हमारी वास्तविक शक्ति आंतरिक योग्यताओं में छिपी होती है। जो शक्ति समाज को प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देती, वही जीवन के संचालन की मुख्य आधारशिला होती है।
भगवान के हाथों में धारण किए गए अस्त्र भी गहन दर्शन देते हैं। उनके एक हाथ में अंकुश है। यह संकेत देता है कि समाज, कानून या शासन हमें अनुशासित करे, उससे पहले हमें स्वयं को आत्म-संयमित कर लेना चाहिए। स्व-अनुशासन ही स्वतंत्रता और आत्म-सम्मान का सच्चा मार्ग है।
विशालकाय गणेश जी की सवारी एक छोटा सा मूषक है। यह अद्भुत विरोधाभास स्थापित करता है कि हमारी भौतिक आवश्यकताएं सीमित होनी चाहिए। मूषक अत्यंत कम संसाधनों में भी अपना रास्ता बना लेता है। यह सिखाता है कि सीमित संसाधनों में अधिकतम परिणाम देने की क्षमता ही मनुष्य को महान बनाती है।
अतः गणेश चतुर्थी केवल पूजा-अर्चना तक सीमित न रहकर आत्म-मंथन का अवसर बनना चाहिए। श्री गणेश जी की दूरदर्शिता, माता-पिता के प्रति भक्ति, संयम, सहृदयता, सजगता और सादगी को अपने आचरण में ढालना ही उनकी सच्ची आराधना है। यदि हम इन अमर जीवन-सूत्रों को अपने दैनिक जीवन में लागू करें तो एक अनुशासित, सहिष्णु और संवेदनशील समाज का निर्माण संभव है। यही विघ्नहर्ता के चरणों में हमारी सच्ची पुष्पांजलि होगी। (लेखक मध्य प्रदेश योग आयोग के कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त अध्यक्ष हैं।) (विनायक फीचर्स)

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article