– लखनऊ में गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ
– मुख्यमंत्री ने युवाओं से किताबें पढ़ने और देश-दुनिया को समझने का किया आह्वान
लखनऊ। राजधानी में गोमती पुस्तक महोत्सव का शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया। इस अवसर पर उन्होंने पुस्तक संस्कृति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि डिजिटल युग में भले ही पढ़ने के माध्यम बदल गए हों, लेकिन किताबों का महत्व कभी खत्म नहीं होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज के हर उम्र के व्यक्ति को पुस्तक पढ़ने की आदत विकसित करनी चाहिए। किताबें केवल जानकारी देने का माध्यम नहीं हैं, बल्कि व्यक्ति के विचारों को व्यापक बनाने और उसकी समझ को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ पुस्तकों का ज्ञान हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि देश और दुनिया में क्या हो रहा है, इसे समझना भी जरूरी है। उन्होंने युवाओं को लगातार सीखते रहने और चुनौतियों के सामने कभी हार न मानने की प्रेरणा दी।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पुस्तक ‘एग्जाम वॉरियर्स’ का उल्लेख करते हुए कहा कि विद्यार्थियों और युवाओं को इसे पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि परीक्षा और जीवन की चुनौतियों का सामना आत्मविश्वास के साथ करना चाहिए तथा असफलता से निराश होने के बजाय उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने प्रदेश सरकार की ग्रामीण क्षेत्रों में पुस्तक संस्कृति विकसित करने की पहल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने ग्राम सचिवालयों की स्थापना की है और हर ग्राम पंचायत में पुस्तकालय की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य गांवों में भी बच्चों, युवाओं और आम लोगों को पढ़ने के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराना है।
उन्होंने कहा कि पुस्तक महोत्सव जैसे आयोजन इसलिए जरूरी हैं क्योंकि इससे समाज में पढ़ने की संस्कृति को प्रोत्साहन मिलता है। आज के युवा किताबें पढ़ना चाहते हैं और उन्हें बेहतर साहित्य तथा ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध कराने की जरूरत है।
सीएम योगी ने कहा कि तकनीक और डिजिटल माध्यमों के विस्तार के बावजूद पुस्तकें अपना महत्व बनाए रखेंगी। डिजिटल सामग्री से सूचनाएं तेजी से मिल सकती हैं, लेकिन पुस्तकें व्यक्ति के चिंतन, अध्ययन और विचारों को गहराई देने का काम करती हैं।
मुख्यमंत्री ने गोमती पुस्तक महोत्सव को ज्ञान, साहित्य और विचारों के आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण मंच बताते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों को लगातार प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी में अध्ययन और पुस्तक प्रेम की आदत मजबूत हो सके।


