शरद कटियार
बाबा नीम करोली की पुण्यतिथि का दिन फर्रुखाबाद के लिए इस बार केवल श्रद्धा और स्मरण का अवसर नहीं है, बल्कि विकास की एक नई संभावना लेकर आया है। पर्यटन मंत्री और जिले के प्रभारी मंत्री जयवीर सिंह की ओर से नीम करोली धाम को उत्तर प्रदेश के 13वें आध्यात्मिक पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित करने का ऐलान इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
नीम करोली धाम की पहचान पहले से देश-विदेश तक है। बाबा के प्रति आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यदि इस आस्था को बेहतर सड़क, हवाई संपर्क, ठहरने की सुविधाओं, स्वच्छता, सुरक्षा और सुव्यवस्थित पर्यटन व्यवस्था से जोड़ दिया जाए तो फर्रुखाबाद के लिए विकास के नए दरवाजे खुल सकते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मोहम्मदाबाद हवाई पट्टी को छोटे हवाई अड्डे के रूप में विकसित करने की योजना को इस परियोजना से जोड़ा गया है। यदि यह योजना धरातल पर उतरती है तो देश के दूर-दराज क्षेत्रों और विदेशों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए फर्रुखाबाद तक पहुंच आसान होगी।
लेकिन किसी भी पर्यटन परियोजना की असली सफलता केवल निर्माण कार्यों में नहीं होती। असली सफलता तब होगी जब नीम करोली धाम पर आने वाला श्रद्धालु स्थानीय अर्थव्यवस्था का हिस्सा बने। होटल खुलें, स्थानीय परिवहन बढ़े, छोटे दुकानदारों की बिक्री बढ़े, स्थानीय उत्पादों की मांग बढ़े और युवाओं को रोजगार मिले,तभी पर्यटन का वास्तविक लाभ आम आदमी तक पहुंचेगा।
प्रस्तावित आध्यात्मिक सर्किट का दूसरा महत्वपूर्ण पक्ष है,लखनऊ, फर्रुखाबाद, फिरोजाबाद और वृंदावन को जोड़ना। यह केवल धार्मिक स्थलों को जोड़ने की योजना नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसे एक व्यापक पर्यटन गलियारे के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। फर्रुखाबाद के अन्य धार्मिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों को भी इससे जोड़ा जाए तो जिले में पर्यटकों के ठहराव की अवधि बढ़ सकती है।
पुण्यतिथि पर लिया गया यह संकल्प इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि आस्था को विकास से जोड़ने का इससे बेहतर अवसर नहीं हो सकता। बाबा नीम करोली की शिक्षाओं और उनकी आध्यात्मिक विरासत का सम्मान करते हुए आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं, लेकिन यह ध्यान रखना होगा कि विकास के नाम पर धाम की मूल आध्यात्मिक पहचान प्रभावित न हो।
सड़क बने, हवाई सुविधा आए, होटल और अन्य पर्यटन सुविधाएं विकसित हों—लेकिन साथ ही स्वच्छता, पर्यावरण, यातायात और स्थानीय संस्कृति का संरक्षण भी प्राथमिकता में रहे। सरकार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती घोषणा को जमीन पर उतारने की है। डीपीआर तैयार होने से लेकर बजट, निर्माण और सुविधाओं के संचालन तक हर चरण की समयबद्ध निगरानी जरूरी होगी। स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की भागीदारी भी सुनिश्चित करनी होगी।
बाबा नीम करोली की पुण्यतिथि पर फर्रुखाबाद के सामने विकास का जो नया सपना रखा गया है, उसे केवल सरकारी परियोजना न बनाकर जनभागीदारी का अभियान बनाया जाना चाहिए। क्योंकि नीम करोली धाम का विकास केवल एक धार्मिक स्थल का विकास नहीं होगा। यह फर्रुखाबाद की पहचान, पर्यटन, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाला परिवर्तन बन सकता है।
पुण्यतिथि पर बाबा को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि उनकी धरती पर आने वाला हर श्रद्धालु आस्था के साथ सुविधा और सम्मान लेकर लौटे,और स्थानीय युवा अपने ही क्षेत्र में रोजगार और बेहतर भविष्य की उम्मीद देख सके।


