– ईरान युद्ध के बीच ऊर्जा सुरक्षा पर दुनिया की नजर
– विकासशील देशों पर बढ़ सकता है दबाव
नई दिल्ली। भारत की राजधानी में ब्रिक्स सम्मेलन-2026 को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है और ईरान युद्ध के बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंताएं गहरा रही हैं।
ऊर्जा संकट का सबसे बड़ा असर विकासशील देशों पर पड़ने की आशंका है। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति प्रभावित होने की स्थिति में इन देशों की अर्थव्यवस्था पर महंगाई और आयात लागत का दबाव बढ़ सकता है।
ऐसे माहौल में ब्रिक्स सम्मेलन में ऊर्जा सुरक्षा, वैश्विक अर्थव्यवस्था और विकासशील देशों की आर्थिक चुनौतियां प्रमुख मुद्दे बन सकते हैं। दुनिया की नजर इस बात पर होगी कि ब्रिक्स देश ऊर्जा आपूर्ति को स्थिर रखने और संभावित संकट के असर को कम करने के लिए किस तरह की साझा रणनीति पर सहमति बनाते हैं।
भारत के लिए भी यह सम्मेलन महत्वपूर्ण है। ऊर्जा की बढ़ती जरूरतों के बीच स्थिर और किफायती ऊर्जा आपूर्ति आर्थिक विकास के लिए बेहद अहम है। ऐसे में ब्रिक्स मंच पर भारत की भूमिका संकट से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों को दिशा देने में महत्वपूर्ण हो सकती है।
अगर ऊर्जा संकट गहराता है तो उसका असर केवल तेल और गैस की कीमतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन, उद्योग, खाद्य कीमतों और आम उपभोक्ता तक दिखाई दे सकता है। यही वजह है कि दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन से वैश्विक अर्थव्यवस्था को स्थिरता देने की उम्मीदें भी जुड़ी हैं।


